ट्राउट मत्स्य पालन से आत्मनिर्भरता की मिसाल: दिनेश सिंह चौधरी की प्रेरक सफलता की कहानी
भर्ती से लेकर मंदिरों तक हर मोर्चे पर सरकार विफल: गोदियाल
बिजनौर की पुरानी रंजिश में चली थीं गोलियां, रायपुर फायरिंग कांड का खुलासा; तीन आरोपी गिरफ्तार
रामनगर के रिजॉर्ट में देह व्यापार और शराब पार्टी का भंडाफोड़, 52 पुरुष व 10 महिलाएं गिरफ्तार, होटल सील
रुद्रप्रयाग में कूड़ा निस्तारण को लेकर विवाद, सभासद ने सोनप्रयाग-सीतापुर से आए पांच ट्रक लौटाए
नशे की लत ने बेटे को बनाया हैवान: रोकने पर मां के सिर में मारी गोली, खुद ही खून से लथपथ हालत में एम्स पहुंचाया
मनसा देवी मंदिर में अब बिना जेब वाले कुर्ते पहनेंगे पुजारी, चढ़ावे में पारदर्शिता के लिए ट्रस्ट का बड़ा फैसला
वरिष्ठ पत्रकार मनजीत नेगी की अनूठी पहल: जापान के आध्यात्मिक गुरु श्री बाला कुंभ गुरु मुनि का यमकेश्वर में भव्य स्वागत, पर्यावरण और सनातन संस्कृति का दिया संदेश
देहरादून गोलीकांड के विरोध में फूटा लोगों का गुस्सा, शराब का ठेका बंद कर हटाने की उठी मांग
टीईटी से छूट समेत 13 सूत्रीय मांगों को लेकर शिक्षकों ने मुख्यमंत्री धामी से की मुलाकात, न्यायसंगत समाधान का मिला आश्वासन

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  • भर्ती से लेकर मंदिरों तक हर मोर्चे पर सरकार विफल: गोदियाल

    भर्ती से लेकर मंदिरों तक हर मोर्चे पर सरकार विफल: गोदियाल0

    कांग्रेस की परिवर्तन संकल्प यात्रा रविवार को बागेश्वर से कपकोट पहुंची, जहां रामलीला मैदान में आयोजित जनसभा में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार भर्ती प्रक्रिया से लेकर मंदिरों के प्रबंधन, महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा और रोजगार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर पूरी तरह विफल साबित हुई है। गोदियाल ने कार्यकर्ताओं से सत्ता परिवर्तन का संकल्प लेकर गांव-गांव पहुंचने और कांग्रेस की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।

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बकीबात

पर्यटन समाचार

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  • बूंद-बूंद को तरसते पहाड़: सूखते जल स्रोतों से कैसे बचेगा उत्तराखंड?

    बूंद-बूंद को तरसते पहाड़: सूखते जल स्रोतों से कैसे बचेगा उत्तराखंड?0

    उत्तराखंड को कभी जल स्रोतों की धरती कहा जाता था। यहां के पहाड़ों से निकलने वाले प्राकृतिक नौले, धारे, गदेरे और झरने गांवों की जीवनरेखा थे। लेकिन आज वही जल स्रोत तेजी से सूख रहे हैं। राज्य के कई गांवों में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गर्मियों के मौसम में स्थिति और गंभीर हो जाती है। महिलाओं को कई किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ता है और खेती-बाड़ी भी प्रभावित हो रही है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में यह संकट और भयावह रूप ले सकता है।

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