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मुकेश अंबानी ने बदरी-केदार धाम को दिए 10 करोड़ रुपये, देश की खुशहाली के लिए की विशेष पूजा
33 स्वर्ण पदक जीतकर देहरादून बना उत्तराखंड वुशू का नया चैंपियन
माणा गांव में खुले भगवान घंटाकर्ण मंदिर के कपाट, श्रद्धा और उत्साह के साथ हुआ भव्य आयोजन
गोपनीय दौरे में मसूरी विधानसभा का राजनीतिक तापमान भांप गए नितिन नवीन, भाजपा में दावेदारों की बढ़ी सक्रियता
तुंगनाथ ट्रैक पर रास्ता भटके पांच पर्यटकों को सुरक्षित बचाया, प्रशासन और रेस्क्यू टीमों की तत्परता से टला बड़ा हादसा
एआई कैमरों की निगरानी में संपन्न हुई यूकेएसएसएससी स्नातक स्तरीय परीक्षा, 83 हजार से अधिक अभ्यर्थी हुए शामिल
आईएमए के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय: पहली बार नौ महिला कैडेट बनीं सेना अधिकारी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ली पासिंग आउट परेड की सलामी
डाक बांटने में लापरवाही पड़ी भारी, दो माह तक डाक रोकने पर डाककर्मी निलंबित
सहसपुर में भाजपा नेता की हत्या के बाद भड़की सांप्रदायिक हिंसा, पुलिस पर पथराव, दो घर फूंके, आरोपियों के मकान-दुकान जमींदोज

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  • बूंद-बूंद को तरसते पहाड़: सूखते जल स्रोतों से कैसे बचेगा उत्तराखंड?

    बूंद-बूंद को तरसते पहाड़: सूखते जल स्रोतों से कैसे बचेगा उत्तराखंड?0

    उत्तराखंड को कभी जल स्रोतों की धरती कहा जाता था। यहां के पहाड़ों से निकलने वाले प्राकृतिक नौले, धारे, गदेरे और झरने गांवों की जीवनरेखा थे। लेकिन आज वही जल स्रोत तेजी से सूख रहे हैं। राज्य के कई गांवों में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गर्मियों के मौसम में स्थिति और गंभीर हो जाती है। महिलाओं को कई किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ता है और खेती-बाड़ी भी प्रभावित हो रही है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में यह संकट और भयावह रूप ले सकता है।

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  • लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ होंगे भारतीय सेना के नए प्रमुख, 30 जून को संभालेंगे कमान

    लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ होंगे भारतीय सेना के नए प्रमुख, 30 जून को संभालेंगे कमान0

    भारतीय सेना को जल्द ही नया नेतृत्व मिलने जा रहा है। वर्तमान उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को देश का अगला सेना प्रमुख (चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ) नियुक्त किया गया है। वह 30 जून को सेना प्रमुख का पदभार ग्रहण करेंगे। मौजूदा सेना प्रमुख उपेन्द्र द्विवेदी इसी दिन सेवानिवृत्त हो रहे हैं। लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ का सेना प्रमुख बनना कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि वर्ष 1997 के बाद पहली बार आर्मर्ड कोर (बख्तरबंद रेजिमेंट) से संबंधित कोई अधिकारी सेना की सर्वोच्च कमान संभालेगा।

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