हमारा उत्तराखंड

 मंदिर जहां नहीं होता दर्शन

सनातन धर्म में चैतीस करोड़ देवी-देवताओं को अलग-अलग रूप में पूजा जाता है, लेकिन उत्तराखंड के चमोली जिले के देवाल ब्लाक में एक ऐसे भी देवता हैं, जिनके दर्शन भक्त तो रहे दूर खुद पुजारी भी नहीं कर सकता। इस देवता के मंदिर के कपाट एक ही दिन के लिए खुलते हैं और पुजारी भी आंख पर पट्टी बांधकर कपाट खोलते हैं। श्रृद्धालु भी दिनभर दूर से ही दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं।

देवाल विकासखंड के वाण गांव में स्थिति लाटू देवता का मंदिर है। इस मंदिर के कपाट साल में एक दिन ही खुलते हैं और उसी दिन सांय को बंद हो जाएंगे। इस दिन लाटू देवता मंदिर में श्रृद्धालु भारी संख्या में आकर पूजा अर्चना कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं।

इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां श्रृद्धालु तो दूर स्वयं पुजारी भी भगवान के दर्शन नहीं कर पाता है। पुजारी आंखों व मुंह पर पट्टियां बांधकर लाटू देवता की पूजा अर्चना करता है। मंदिर से कोई अंदर न देखे इसके लिए मंदिर के मुख्य कपाट पर पर्दा लगाया जाता है। माना जाता है कि इस मंदिर के अंदर साक्षात रूप में नागराज मणि के साथ निवास करते हैं। श्रृद्धालु साक्षात नाग को देखकर डरे नहीं, इसलिए मुंह और आंख पर पट्टी बांधी जाती है। यह भी कहा जाता है कि पुजारी के मुंह की गंध देवता तक न पहुंचे इसलिए उसके मुंह पर पूजा अर्चना के दौरान भी पट्टी बंधी रहती है। जिस दिन लाटू देवता के कपाट खुलते हैं उस दिन यहां पर विष्णु सहस्रनाम व भगवती चंडिका का पाठ भी किया जाता है।

लाटू देवता को उत्तराखंड की आराध्या देवी नंदा देवी का धर्म भाई माना जाता है। मान्यताओं व श्रुतियों के अनुसार लाटू कन्नौज के गर्ग गोत्र का कान्याकुंज ब्राह्मण था। वह भगवती नंदा का पता करने के लिए कैलाश पर्वत पर जा रहा था। उसी दौरान वाण गांव के दोदा नामक तोक में लाटू एक घर में एक बूढ़ी स्त्री से पीने का पानी मांगता है। बताते हैं कि लाटू व बूढ़ी स्त्री दोनों एक दूसरे के भाषाओं को समझ नहीं पाए। इशारे कर बुढ़िया ने उसे घर के अंदर पानी पीने के लिए भेजा। घर के अंदर कांच के घड़े में जान (स्थानीय स्तर पर बनने वाली कच्ची शराब) और मिट्टी के दूसरे घड़े में पानी था, लेकिन जान इतना स्वच्छ रहता है कि लाटू उसे साफ पानी समझकर पी लेता है। जब लाटू को पता चलता है कि उसने पानी की जगह शराब पी ली है और उसका कर्म भ्रष्ट हो गया है तो उसे अपने पर घृणा आती है। अपराध बोध होने पर वह दरवाजे पर अपनी जीभ बाहर निकालता है।

लाटू देवता स्थानीय लोगों का आराध्य देवता है। वाण में स्थित लाटू देवता के मंदिर के कपाट सालभर में एक ही बार एक दिन के लिए खुलते हैं। इस दिन यहां विशाल मेला लगता है।