सरोकार

केदारनाथ में ध्यान साधना : अतुल्य उत्तराखंड की ब्रांडिंग

इस बार की चारधाम यात्रा कई मायनों में खास है। यात्रा की शुरुआत में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केदारनाथ पहुंचे। बाबा केदारनाथ के दर्शन किए और केदारपुरी में चल रहे निर्माण कार्यों की मौके पर समीक्षा की। केदारपुरी में खासतौर पर बनाई गई रुद्र गुफा में ध्यान साधना की और सुरक्षित एवं अतुल्य उत्तराखंड का संदेश देते हुए लोगों को यहां आने के लिए आमंत्रित किया।

‘केदारनाथ धाम तो आस्था और कुदरत का अनूठा संगम है।अब केदारनाथ में काम ठीक चल रहा है। मैं अपेक्षा करता हूं कि लोग सिंगापुर और दुबई जाने के अलावा केदारनाथ तथा अन्य जगहों पर भी जाएं क्योंकि यहां देखने लायक काफी कुछ है।’ नरेंद्र मोदी

हिल-मेल ब्यूरो, केदारनाथ

18 मई का दिन उत्तराखंड के लिए खास था। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद लोगों को उत्तराखंड आने और यहां की प्राकृतिक सुंदरता को देखने का न्यौता दिया। बुद्ध पूर्णिमा के दिन केदारनाथ में ध्यान-साधना से पीएम मोदी ने देश-दुनिया का ध्यान केदारपुरी की ओर आकर्षित किया। उत्तराखंड के तीर्थाटन को बढ़ावा देने की यह कोशिश आने वाले समय में उत्तराखंड की आर्थिकी के लिए मील का पत्थर साबित होगी। कौन भूल सकता है उत्तराखंड के आर्थिक चक्र को घुमा देने वाली केदारनाथ की वो त्रासदी। प्रलंयकारी बाढ़ का विनाश जिसने भी देखा, सहम गया। लाखों लोगों के रोजगार का जरिया चारधाम यात्रा अपना रंग खोने लगी थी लेकिन इसके बाद शुरू हुआ केदारपुरी को सजाने-संवारने और फिर से बसाने का भागीरथ प्रयास, जो अब अपना रंग दिखाने लगा है। चारधाम यात्रा फिर नए कीर्तमान बना रही है। 

सात मई को अक्षय तृतीया के दिन गंगोत्रीऔर यमुनोत्री मंदिरों के कपाट खुलने के साथ ही उत्तराखंड की प्रख्यात चारधाम यात्रा शुरू हो गई। केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के कपाट 9 और 10 मई को खुले। पहले ही दिन केदारनाथ में रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा केदारनाथ के दर्शन किए। 2013 में आई आपदा के बाद केदारनाथ में चलाए जा रहे पुनर्निर्माण कार्यों के बीच यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। पहले दस दिन में ही केदारनाथ में आने वाले बाबा के भक्तों की संख्या 80 हजार को पार कर गई है।

इस बार की चारधाम यात्रा कई मायनों में खास है। यात्रा की शुरुआत में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केदारनाथ पहुंचे। उन्होंने न सिर्फ बाबा केदारनाथ के दर्शन किए बल्कि यहां चल रहे निर्माण कार्यों की मौके पर समीक्षा की। यही नहीं उनका यह दौरा केदारपुरी में खासतौर पर बनाई गई रुद्र गुफा में की गई ध्यान साधना को लेकर चर्चित रहा।

लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण के लिए प्रचार खत्म होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी केदारनाथ में ध्यान साधना के लिए पहुंचे थे। उन्होंने यहा बनी रुद्र गुफा में 17 घंटे तक ध्यान साधना की। यह गुफा केदारनाथ मंदिर परिसर से डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर बनी है। इसकी ऊंचाई करीब 12,250 फीट है।

पीएम मोदी का उत्तराखंड से लगाव किसी से भी छूटा नहीं है। सार्वजनिक जीवन में आने से पहले उन्होंने यहां काफी समय बिताया है। वह खुद केदारनाथ में रह चुके हैं। ऐसे में केदारपुरी में रात गुजारकर पीएम मोदी का लोगों को उत्तराखंड आने का संदेश देना यहां प्राकृतिक पर्यटन के लिए मिली नई संजीवनी के समान है। उत्तराखंड में आई आपदा के बाद पहले कुछ साल उत्तराखंड का पर्यटन काफी प्रभावित हुआ। पर्यटकों ने प्रयलंयकारी बाढ़ की विभीषिका देखने के बाद यहां आने से परहेज किया। लेकिन उत्तराखंड और विशेषकर केदारनाथ में हुए पुनर्निर्माण कार्य के बाद धीरे-धीरे लोगों का भरोसा बहाल हुआ है। अब लगातार यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है।

चारधाम यात्रा को उत्तराखंड के लोगों की आजीविका की धुरी माना जाता है। छह महीने के सीजन के दौरान यात्रा मार्ग में यह रोजगार के कई अवसर मुहैया कराती है। यही वजह है कि केंद्र ने उत्तराखंड के नैसर्गिक सौंदर्य तक लोगों की पहुंच को बढ़ाने के लिए ऑल वेदर रोड जैसी पहल की है। इसका काम तेज गति से चल रहा है। हालांकि अभी लोगों को इसके चलते कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन आने वाले समय में यह रोड उत्तराखंड की सबसे बड़ी समस्या पलायन को रोकने का कारण बन सकती है।

पीएम ने 17 घंटे के ध्यान साधना के बाद दिए संदेश में कहा कि भले ही आप सिंगापुर या दुबई कहीं भी घूमने जाते हों, लेकिन यहां जरूर आएं। यहां कई ऐसी जगहें हैं, जो बहुत खूबसूरत हैं। केदारनाथ धाम तो आस्था और कुदरत का अनूठा संगम है।उत्तराखंड की आध्यात्मिक यात्रा पर केदारनाथ और बदरीनाथ धाम पहुंचे पीएम मोदी ने केदारनाथ स्थित गुफा में साधना के बाद यह कहकर देश-दुनिया को ‘सुरक्षित उत्तराखंड-सुरक्षित यात्रा’ का संदेश दिया। इससे जहां उत्तराखंड के साथ ही चारधाम यात्रा की ब्रांडिंग हुई, वहीं उम्मीद जगी है कि अब दुनियाभर से श्रद्धालुओं व सैलानियों का रुख उत्तराखंड की ओर होगा। अब यह राज्य सरकार पर निर्भर है कि वह तीर्थाटन व पर्यटन के लिहाज से आर्थिकी संवारने की दिशा में इसका कितना लाभ उठा पाती है।गुफा में साधना और रहने के पीछे भी उनका उद्देश्य यही था कि वह खुद केदारनाथ यात्रा के पूरी तरह से सुरक्षित होने का संदेश दें। उन्होंने मीडिया का आभार जताते हुए कहा कि चुनाव की व्यस्तता के बावजूद वह केदारनाथ पहुंची और इससे अच्छा संदेश जाएगा कि केदारनाथ में सुख सुविधाएं विकसित हो चुकी हैं। 

केदारनाथ ने पुनर्निर्माण का विकास कार्य शुरू करने के बाद पीएम मोदी ने ही केदारनाथ में इस गुफा बनाने के निर्देश दिए थे। पीएम मोदी ने अक्टूबर 2017 में केदारनाथ में पांच योजनाओं का शिलान्यास किया था। उस समय उन्होंने योग, साधना और आध्यात्म के लिए केदारपुरी में गुफाओं के निर्माण की भी बात कही थी। नेहरू पर्वतारोहण संस्थान ने तत्कालीन प्रिंसिपल कर्नल  अजय कोठियाल के नेतृत्व में रुद्र गुफा का निर्माण किया था। 

पीएम मोदी शिव के अनन्य भक्त हैं। एक ओर वह शिव की नगरी कही जाने वाली काशी यानी वाराणसी से सांसद हैं। वहीं दूसरी ओर वह निरंतर केदारनाथ जाते रहते हैं। पीएम बनने के बाद वह पिछले दो साल में चार बार केदारनाथ धाम के दर्शनों के लिए पहुंचे चुके हैं। पीएम पहली बार तीन मई 2017 को केदारनाथ पहुंचे थे। इसके बाद 20 अक्टूबर 2017 को केदारनाथ पहुंचे। सात नवंबर 2018 को दिवाली के मौके पर भी पीएम केदारनाथ पहुंचे थे। अब चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद पीएम 18 मई को केदारपुरी पहुंचे।

पुनर्निर्माण परियोजनाओं का लिया जमीनी जायजा

पीएम मोदी 18 मई को सुबह साढ़े नौ बजे केदारनाथ धाम पहुंचे। उन्होंने सीधे केदारनाथ मंदिर पहुंचकर पूजा अर्चना की। गर्भगृह में धाम के मुख्य पुजारी ने रुद्राभिषेक  करवाया। केदारनाथ पुनर्निर्माण प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल है। समय-समय पर वह व्यक्तिगत रूप से कार्यों की प्रगति की रिपोर्ट लेते रहते हैं। पूजा अर्चना के बाद वह यहां चल रहे कार्यों की प्रगति का जायजा लेते रहे। करीब एक घंटे तक उन्होंने निर्माणाधीन शंकराचार्य समाधि स्थल, सरस्वती घाट और सुरक्षा दीवार का जायजा लिया। उत्तराखंड के मुख्य सचिव उत्पल कुमार से उन्होंने निर्माण की प्रगति रिपोर्ट भी ली। इससे पहले, निम के पूर्व कर्मचारी मनोज सेमवाल ने उन्होंने शंकराचार्य की समाधि से जुड़े प्रोजेक्ट के बारे में विस्तार से बताया। पीएम को बताया गया कि यह प्रोजेक्ट दो साल में पूरा हो जाएगा। पीएम ने काफी बारीकी से यहां चल रहे प्रोजेक्टों की पड़ताल की।

नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) ने आपदा के बाद केदारनाथ में पुनर्निर्माण का जिम्मा तब अपने हाथ में लिया था जब दूसरी एजेंसियां पीछे हट गई थीं। निम ने तत्कालीन प्रिंसिपल कर्नल अजय कोठियाल के नेतृत्व में केदारपुरी में विपरीत परिस्थितियों में काम शुरू किया। आज केदारपुरी जिस स्वरूप में नजर आ रही है, उसका श्रेय कर्नल (रिटा.) कोठियाल और उनकी टीम को जाता है। वह अब भी वुड स्टोन नाम की कंपनी के जरिये केदारनाथ में कई पुनर्निर्माण के काम से जुड़े हुए हैं। शंकराचार्य की समाधि के बारे में जानकारी लेने के बाद पीएम मोदी ने चीफ सेक्रेटरी उत्पल कुमार से अलग से भी दूसरे प्रोजेक्टों का ब्यौरा लिया। पीएम मोदी समय-समय पर केदारनाथ में चल रहे कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते रहते हैं।

चार धामों की प्रसिद्ध तीर्थयात्रा में देश के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। चारों धामों के कपाट खुलने के शुरुआती दौर में ही यात्रा ने खासी रफ्तार पकड़ ली है। कपाट खुलने के दस दिन के भीतर ही चारधाम यात्रा पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का आंकड़ा एक लाख को पार कर चुका है। श्रद्धालुओं का यह आंकड़ा चारधाम यात्रा से जुड़े व्यवसायियों के लिए अच्छे संकेत दे रहा है।  सात मई को अक्षय तृतीया के दिन गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा का शुभारंभ हो गया था। नौ मई को केदारनाथ व दस मई को बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही यात्रा में तेजी आ गई।  वर्ष 2013 की आपदा के बाद ऐसा पहली बार है कि शुरुआती दौर में ही चारधाम यात्रा में तेजी आई है। इसका बड़ा कारण यह भी रहा कि चारों धामों के कपाट इस वर्ष लगभग एक-दो दिन के अंतराल में ही खुले हैं। वही, विगत वर्ष गंगोत्री, यमुनोत्री के कपाट खुलने के डेढ़ सप्ताह बाद बदरीनाथ व केदारनाथ धाम के कपाट खुले थे। 

आपदा के बाद वर्ष 2014 से सरकार ने चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के पंजीकरण करने की व्यवस्था बनाई थी। इसके बाद त्रिलोक सिक्योरिटी सिस्टम को यात्रियों का फोटोमैट्रिक पंजीकरण करने का जिम्मा सौंपा गया था।

चारधाम यात्रा के साथ हजारों लोगों की आजीविका और प्रदेश के राजस्व का भी बड़ा स्त्रोत है। वर्ष 2013 में केदार घाटी में आयी आपदा के बाद चारधाम यात्रा पूरी तरह से ठप हो गई थी। वर्ष 2014 में तो आपदा का भय श्रद्धालुओं में इस कदर रहा कि पूरे यात्राकाल में ही अपेक्षा से बेहद कम यात्री चारधाम यात्रा पर पहुंचे। साल 2015 में जाकर चारधाम यात्रा की खामोशी टूटी और इसके साथ ही चारधाम यात्रा पर निर्भर परिवहन और अन्य व्यवसायियों को भी कुछ राहत मिली। 

पिछले तीन वर्षों से चारधाम यात्रा कुछ पटरी पर लौटी है। आपदा के बाद यह पहला वर्ष है, जब शुरुआत में ही चारधाम यात्रा ने अच्छी गति पकड़ ली है। पिछले वर्षों की बात करें तो वर्ष 2013 की आपदा के बाद वर्ष 2014 में दो मई को गंगोत्री-यमुनोत्री धाम के कपाट खुले थे। इसके एक सप्ताह बाद तक महज 9037 यात्री ही धामों के दर्शन को गए थे। वर्ष 2015 में 21 अप्रैल को गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के एक सप्ताह बाद यह आंकड़ा 14 हजार 541 था। वर्ष 2016 में नौ मई को गंगोत्री-यमुनोत्री के कपाट खुलने के एक सप्ताह बाद 80 हजार 923 यात्री धामों को रवाना हो चुके थे। वहीं वर्ष 2017 में 28 अप्रैल को कपाट खुलने के बाद 42 हजार 457 यात्री जबकि गत वर्ष यानी 2018 में 18 अप्रैल को गंगोत्री-यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के एक सप्ताह बाद यह संख्या महज सात हजार 706 थी। 

वर्ष 2018 में गंगोत्री-यमुनोत्री के कपाट 18 अप्रैल को खुल गए थे। जबकि केदानाथ धाम के कपाट 29 अप्रैल व बदरीनाथ के कपाट 30 अप्रैल को खुले थे। यही वजह रही कि चारों धामों के कपाट खुलने के बीच करीब ग्यारह दिन का अंतर होने की वजह से वर्ष 2018 में शुरूआती सप्ताह में यात्रा बेहद धीमी रही। जबकि इस वर्ष सात मई को गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के बाद नौ मई को केदारनाथ व 10 मई को बदरीनाथ के कपाट खुले हैं, जिससे शुरुआती दौर में यात्रा ने खासी गति पकड़ ली है। इस एक सप्ताह में ही चारधाम यात्रियों की संख्या 88 हजार 692 तक पहुंच गई है, जो एक नया रिकॉर्ड है।

पहले सप्ताह में चारधाम यात्रा की स्थिति 

वर्ष          यात्रियों की संख्या 

2014       9037 

2015      14541 

2016      80923 

2017     42457 

2018     7706 

2019     88692 

स्त्रोत: त्रिलोक सेक्योरिटी सिस्टम प्रा. लि. ऋषिकेश

कमाई के भी बन रहे रिकॉर्ड

गढ़वाल मंडल विकास निगम ने पहले दस दिन में पौने आठ करोड़ का कारोबार कर लिया है। ऑनलाइन और ऑफलाइन बुकिंग से निगम को यह आय हुई है। इससे निगम को घाटे से उबरने की उम्मीद बढ़ गई है। खासकर 20 मई से 20 जून तक पीक सीजन में आय दोगुनी होने की उम्मीद है।गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा शुरू हो गई थी। इसी के साथ केदारनाथ और बदरीनाथ के कपाट भी खुल गए। चारों धाम में यात्रियों की संख्या हर दिन बढ़ रही है। इसका लाभ गढ़वाल मंडल विकास निगम को मिल रहा है। निगम ने ऑनलाइन, ऑफलाइन और कैश सेल कर सिर्फ 10 दिन के भीतर पौने आठ करोड़ की कमाई की है। पिछले साल यह कमाई छह करोड़ के करीब थी। 

इस बार चारधाम रूट के प्रमुख बंगलों की बुकिंग ऑनलाइन की जा रही है। इससे निगम को आगे भी अच्छी कमाई की उम्मीद है। जीएमवीएन के एजीएम पर्यटन गंभीर सिंह का कहना है कि बारिश न होने पर 20 जून तक यात्रा का पीक सीजन चलेगा। इसमें आमदनी में और इजाफे की उम्मीद की जा रही है। 

रूट फुल लेकिन परेशानियां भी कम नहीं

चारधाम यात्रा रूट के ऋषिकेश, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, गौरीकुंड, जोशीमठ, औली, बदरीनाथ, उत्तरकाशी, हर्षिल, गंगोत्री के बंगले पिछले दस दिनों से फुल चल रहे हैं। यह बंगले ऑनलाइन बुक हुए हैं। लेकिन यात्रा मार्ग की दुश्वारियां लोगों को परेशान कर रही हैं। ऑलवेदर रोड के काम के चलते जगह-जगह रास्तों में जाम की समस्या आ रही है। सफल निर्धारित समय से काफी लंबा खिंच रहा है।

केदारनाथ दर्शन के लिए जाने वाले यात्रियों को दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मौसम प्रतिकूल होने के चलते रास्ते में काफी दिक्कतें आ रही हैं। लगातार बारिश और बर्फबारी ने केदारनाथ तक के सफर को मुश्किल बनाया है। वहीं केदारनाथ में रहने की सुविधाएं पर्याप्त न होने के कारण भी लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। केदारनाथ में बनाए गए शेल्टरों को बर्फबारी से काफी नुकसान पहुंचा है। वहीं बारिश ने वैकल्पिक उपायों को भी प्रभावित किया है। यात्रियों के लिए केदारपुरी में उनकी संख्या के अनुसार व्यवस्थाओं की कमी है। कई लोग ठंड में ठिठुरते नजर आ रहे हैं। वहीं खाने की उचित व्यवस्था न होने के चलते भी यात्रियों की दुश्वारियां बढ़ी हैं। जिला प्रशासन यात्रियों की संख्या के अनुरूप व्यवस्थाएं करने में नाकाम रहा है। हालांकि पहले दस दिन के बाद कुछ व्यवस्थाओं की ओर ध्यान दिया जा रहा है। केदारपुरी में दस दिन में सात लोगों की जान गई है। ज्यादातर लोगों की जान ऑक्सीजन की कमी के चलते हुई।

सैलानियों के लिए बने 1017 होम स्टे चारधाम यात्रा में पहुंच रहे देश-विदेश के लाखों श्रद्धालु अच्छे अनुभव लेकर लौटें, इसके लिए उत्तराखंड के शासन-प्रशासन ने खास तैयारी कर रखी है। उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में 1017 होम स्टे तैयार कराए हैं। होम स्टे के लिए पर्यटन विभाग को करीब 1292 आवेदन मिले थे, जिनमें से 1017 पंजीकृत हो गए हैं। 275 होम स्टे को अब भी स्वीकृति का इंतजार है। देहरादून में 211, हरिद्वार में 13, टिहरी में 105 और पौड़ी में 20 है। रुद्रप्रयाग में 57, चमोली में 126, ऊधमसिंहनगर में 02 और नैनीताल में 159 होम स्टे हैं। अल्मोड़ा में 103, पिथौरागढ़ में 141, बागेश्वर में 29, चंपावत में 5 होम स्टे हैं।
होम स्टे संबंधी सारी डिटेल आप घर बैठे एक क्लिक पर हासिल कर सकते हैं। होम स्टे के जरिये पर्यटकों को पहाड़ी खान-पान का लुत्फ उठाने का मौका मिलेगा। वो पहाड़ की संस्कृति को करीब से देख सकेंगे, साथ ही उसका हिस्सा भी बन सकेंगे। होम स्टे योजना ने पहाड़ के युवाओं के लिए रोजगार का एक नया जरिया भी इजाद किया है। कुल मिलाकर होम स्टे के जरिए चारधाम यात्रियों को इस बार बड़े, होटल, बंगले और गेस्ट हाउस के विकल्प के तौर पर गांव में घर जैसा माहौल मिलने वाला है। इसके लिए उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद ने सभी पंजीकृत होम स्टे को अपनी वेबसाइट में ऑनलाइन सूचीबद्ध किया हुआ है। होम स्टे में देशी-विदेशी पर्यटक पहाड़ के व्यंजनों के साथ-साथ अपनी डिमांड पर खाना बनवा सकेंगे। जैसी सुविधाएं होंगी, उसी के हिसाब से पर्यटकों को भुगतान करना होगा। सभी होम स्टे ने अपनी सुविधाएं भी ऑनलाइन दर्ज कराई हैं। पर्यटकों से मनमानी फीस ना वसूली जाए, इसके लिए पर्यटन विभाग ने सुविधाओं के अनुरूप होम स्टे का पैकेज बनाया है। प्रमुख पर्यटक स्थल, ट्रेकिंग रूट और धार्मिक स्थलों पर खोले गए होम स्टे में बुकिंग मिलनी शुरू हो गई हैं।

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