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तटरक्षक बल के 42 वर्ष : राजेंद्र सिंह के दमदार तीन साल

1978 में सात पोतों के साथ भारतीय तटरक्षक बल की स्थापना की गई थी। यह सफर 42 साल पूरे कर गया है। तटीय सुरक्षा का जिम्मा उठाने वाले इस बल का बेड़ा दिसंबर, 2018 तक 139 पोत और 62 विमान तक पहुंच चुका है। इस शानदार अवसर पर ‘हिल-मेल’ की प्रबंध संपादक चेतना नेगी ने तटरक्षक बल के महानिदेशक राजेंद्र सिंह से एक्सक्लूसिव बात की। राजेंद्र सिंह तटरक्षक बल के पहले ऐसे अधिकारी हैं, जिन्हें इस बल की कमान सौंपी गई। इससे पहले तक यह पद नौसेना के अधिकारी को दिया जाता था। राजेंद्र सिंह की अगुवाई में तटरक्षक बल ने कामयाबी की कई कहानियां लिखी हैं।

• आपने तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लिया है। भारतीय तटरक्षक बेड़े को मजबूती प्रदान के लिए पिछले तीन वर्षों में कौन से कदम उठाए गए हैं और इस संबंध में भावी योजनाएं क्या हैं?

रक्षा तत्परता के लिए पोतों की संख्या में वृद्धि करना भारतीय तटरक्षक को मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया जाने वाला महत्वपूर्ण कदम है। हम पोतों की संख्या में वृद्धि करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। आधुनिक तकनीकी रुझानों को देखते हुए भारतीय तटरक्षक बल ने नई पीढ़ी के पोतों को बेड़े में शामिल किया गया है, जिनमें नवीनतम प्रोपल्सन प्रणाली, अत्याधुनिक उपकरण और मशीनें लगी हैं। पिछले तीन साल के दौरान 51 पोतों/नौकाओं के अधिग्रहण के लिए 07 पोत अधिग्रहण संविदाओं पर हस्ताक्षर किए गए हैं। मौजदा समय में भारतीय तटरक्षक के बेड़े में 139 पोत हैं। तटरक्षक सुनिश्चित कार्ययोजना 2017-22 के अंतर्गत 47 कमीशंड पोतों के अधिग्रहण का प्रस्ताव है। चरणबद्ध तरीके से अधिग्रहण की योजना बनाई गई है ताकि कंसोलिडेशन पर जोर देते हुए क्षमता निर्माण किया जा सके। मौजूदा समय में 139 पोतों एवं 62 विमानों के साथ भारतीय तटरक्षक बल में पश्चिमी, पूर्वी समुद्री क्षेत्र तथा अंडमान निकोबार को मिलाकर, 05 क्षेत्रीय मुख्यालय, 16 जिला मुख्यालय, 42 तटरक्षक स्टेशन, 02 एयर स्टेशन तथा 08 एयर एंक्लेव शामिल हैं। आज भारतीय तटरक्षक विश्व में चौथे स्थान पर हैं और अगर ऐसे ही उत्तरोत्तर वृद्धि करते रहे तो कुछ ही समय में तीसरे पायदान पर पहुंच जाएंगे।

• बल के मुखिया के तौर पर आपके क्या-क्या प्रमुख कार्य एवं जिम्मेदारियां रही हैं?

भारत के समुद्री क्षेत्रों में राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए देश के सशस्त्र बल के रूप में वर्ष 1978 में अधिनियम के पारित होने के साथ ही भारतीय तटरक्षक का गठन किया गया। भारतीय तटरक्षक बल, रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्यरत है और कई काम करता है।

1. हमारे समुद्री क्षेत्रों में कृत्रिम द्वीपों, अपतटीय टर्मिनलों, संस्थापनाओं तथा अन्य संरचनाओं एवं उपकरणों की सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करना।
2. मछुवारों की सुरक्षा करना तथा समुद्र में संकट के समय उनकी सहायता करना।
3. समुद्री प्रदूषण के निवारण और नियंत्रण सहित हमारे समुद्री पर्यावरण का संरक्षण और परिरक्षण करना।
4. तस्करी-रोधी अभियानों में कस्टम व अन्य विभागों की सहायता करना।
5. समुद्री क्षेत्रों में समय विशेष में प्रभावी अधिनियम के उपबंधों का प्रवर्तन।
6. इसके अतिरिक्त समुद्र में जानमाल की सुरक्षा के लिए कदम उठाना और आवश्यकतानुसार वैज्ञानिक आंकड़ों का संग्रह करना।

अन्य मंत्रालयों को दी जाने वाली सहायता

तटरक्षक बल भारत सरकार द्वारा पारित कानूनों के अनुसार अन्य मत्रालयों को भी अपनी सेवा मुहैया करता है।
1. अवैध शिकार के खिलाफ उपायों का प्रवर्तन, गहरे समुद्र में मछुवारों की मॉनीटरिंग एवं निगरानी करना (कृषि मंत्रालय)।
2. व्यावसायिक पोतों की खोज एवं बचाव (जहाजरानी मंत्रालय)।
3. समुद्री तेल प्रदूषण प्रतिक्रिया उपाय (पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय)।
4. तटीय और समुद्रीय सीमाओं के लिए प्रमुख खुफिया एजेंसी के रूप में कार्य करना (गृह मंत्रालय)।
5. संवेदनशील समुद्री वनस्पति और संकटग्रस्त समुद्री प्रजातियों का संरक्षण (वन एवं पर्यावरण मंत्रालय)।

तटरक्षक बल के महानिदेशक को उनके अन्य महत्वपूर्ण उत्तरदायित्वों के साथ-साथ निम्न संस्थानों की भी जिम्मेदारी संभालनी होती है-

1. राष्ट्रीय सामुद्रिक खोज एवं बचाव
2. बोर्ड अध्यक्ष।
3. राष्ट्रीय तेल बिखराव आपदा आपताकालीन योजना का अध्यक्ष।
4. अपतटीय सुरक्षा समन्वय समिति का अध्यक्ष।
5. एशिया में समुद्री डकैती और पोतों के सशस्त्र लूट के विरूद्ध संघर्ष हेतु क्षेत्रीय सहयोग समझौता के भारतीय गर्वनर।
6. तटीय सुरक्षा से संबंधित सभी मामलों पर केंद्र और राज्य की एजेंसियों के बीच समग्र समन्वय के उत्तरदायित्वों के साथ राज्यक्षेत्रीय समुद्री सीमा में तटीय सुरक्षा के लिए स्थापित तटीय कमान का कमांडर।

• तटरक्षक के 42 वर्ष पूर्ण होने पर आप अपने कार्मिकों को क्या संदेश देना चाहते हैं?

01 फरवरी को भारतीय तटरक्षक बल ने राष्ट्र के प्रति समर्पित एवं विशिष्ट सेवा में 42 वर्ष पूर्ण किया है। इस उत्कृष्ट और जीवंत सेवा के प्रभार में रहते हुए, मैं स्वयं को अत्यंत भाग्यशाली समझता हूं।

जहां तक तटरक्षक संदेश की बात है तो मैं बताना चाहूंगा कि संक्रियाओं की गति एवं लय काफी उत्साहवर्धक रही क्योंकि सेवा ने समुद्र में संकटग्रस्त प्राणों, संपत्तियों की रक्षा, समुद्री प्रदूषण संबंधी घटनाओं, खतरों, प्राकृतिक आपदाओं तथा तटीय सुरक्षा के सम्मुख चुनौतियों का डटकर पूरे जोश एवं उमंग के साथ रक्षा की, इस प्रकार राष्ट्र द्वारा जताए गए भरोसे एवं आकांक्षाओं पर तटरक्षक खरा उतरा।

समुद्री क्षेत्र में, भारतीय तटरक्षक का आपसी मित्रतापूर्ण बंधन एवं समन्वय अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में शीर्ष पर है। भारतीय तटरक्षक को बहुपक्षीय मंच जैसे एसएसीईपी, रिकैप तथा एचएसीजीएएम पर नेतृत्वकर्ता तथा प्रेरणास्रोत के रूप में देखा जाता है। भारतीय तटरक्षक ने अन्य तटरक्षक एजेंसियों के साथ संयुक्त अभ्यासों के संचालन द्वारा अपने संक्रियात्मक दृष्टिकोण को अंतर्राष्ट्रीय कार्यशैलियों एवं विश्वभर में उभरती संक्रियात्मक संकल्पनाओं के साथ सहक्रियाशील बनाया है।

हाल ही में भारतीय तटरक्षक की वृद्धि प्रभावशाली रही है। बहुत से नए पोतों का जलावतरण किया गया एवं सेवा में उन्हें कमीशन एवं शामिल किया गया। हमने 16 एएलएच परियोजना में प्रथम हरित हेलीकॉप्टर प्राप्त किया। संक्रियात्मक अवसंरचना का विशिष्ट रूप से सुदृढ़ीकरण अफसरों एवं कार्मिकों की भर्ती के द्वारा बढ़ती संक्रियात्मक आवश्यकताओं के साथ गति बनाए रखा।

समय के मुताबिक अपडेट तकनीक और रक्षा नीतियों के अनुरूप समीक्षा हमारे बेड़े को अनुकरणीय अवस्था में बनाए रखती है। डिजीटल तटरक्षक के हमारे लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अत्याधुनिक संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग में हमने कोई कसर नहीं छोड़ी है।

मानव संसाधन हमारी आधार स्तंभ है और अफसरों, भर्ती कार्मिक एवं सिविलियन की पदोन्नति एवं एमएसीपी की मंजूरी भी हमारे कार्मिकों के बीच उमंग लाती है। समझौता ज्ञापन के तहत वि•िान्न विश्वविद्यालयों के

साथ नए सहयोग सुनिश्चित करता है हमारे पुरुष कार्मिक एवं महिला कार्मिक पोतों एवं वायु स्क्वॉड्रन में कार्यरत होते हुए भी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के अपने सपने को साकार कर सके।

भारतीय तटरक्षक 21वीं सदी में देश एवं राष्ट्र के प्रति योगदान का आह्वान करता है। भारतीय तटरक्षक उत्कृष्ट सेवा प्रदान करने में समर्थ है। मैं अपने कार्मिकों से अनुरोध करता हूं कि सभी कार्यों में उत्कृष्टता के साथ प्रदर्शन करें। हम परिश्रम की पराकाष्ठा को प्राप्त करेंगे तथा 21वीं सदी में भारत को विश्व गुरू बनाने में भारतीय तटरक्षक एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। मैं, भारतीय तटरक्षक के सभी कार्मिकों तथा परिजनों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं तथा सभी भावी प्रयासों में सफलता की कामना करता हूं।

• पिछले दस वर्षों में तटरक्षक कहां से कहां पहुंच गया है इसके बारे में विस्तृत से बताएं?

भारतीय तटरक्षक भारतीय संघ का एक सशस्त्र बल है और रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। भारत के अनन्य आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) की निगरानी के लिए 01 फरवरी, 1978 को तटरक्षक अंतरिम संगठन के रूप में अस्तित्व में आया था। उस समय इसके बेड़े में 07 पोत शामिल थे। दिसंबर, 2018 तक भातरीय तटरक्षक के बेड़े में 139 पोत एवं 62 विमान शामिल हुए, जो इसको अधिदेशित कर्तव्यों के अनुपालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आज के समय में भारतीय तटरक्षक एक ऐसा संगठन है जिसका व्यापक विस्तार हुआ है। मौजूदा समय में इसके अधीन पश्चिमी, पूर्वी समुद्री क्षेत्र तथा अंडमान निकोबार क्षेत्र, 05 क्षेत्रीय मुख्यालय, 16 जिला मुख्यालय, 42 तटरक्षक स्टेशन, 02 एयर स्टेशन तथा 08 एयर एंक्लेव शामिल हैं। इसके अलावा पिछले 10 वर्षों में तटरक्षक ने निम्नांकित नीतियों एवं कार्यों पर जोर देते अपने विकास क्रम को तीव्र गति से आगे बढ़ाया।

2009 से अब तक कुल 7045 सामुदायिक संवाद कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। हाल ही में हमने मछुआरों से संवाद को सामुदायिक एकीकरण कार्यक्रम में बदल दिया है। इस प्रयास के तहत मछुआरा समुदाय के बच्चों को भारतीय तटक्षकों पोतों और स्टेशनों के दौरों पर ले जाया जाता है, उनके बच्चों को स्कूल बैग और किताबें उपहार में दी जाती हैं। इसके अलावा बच्चों के लिए खेल प्रतिस्पधार्ओं का आयोजन किया जाता है और मछुआरों के बच्चों को भारत सजग नागरिक के तौर पर निखारने की कोशिश की जाती है। इसके परिणाम उत्साहजनक रहे हैं। वर्तमान में मछुआरे परिवार से एक लड़का चिल्का प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण ले रहा है।

समुद्री खोज एवं बचाव के लिए टॉल फ्री हेल्पलाइन 1554 चालू किया गया है। अब तक मछुआरों को 1778 डिस्ट्रेस अलर्ट ट्रांसमीटर्स मुफ्त में वितरित किए गए हैं। इसके अलावा गुजरात, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में मछुआरों को 1530 जीवन रक्षक जैकेट्स वितरित किए गए हैं।

• उत्तराखंड के लोगों को क्या संदेश देना चाहते हैं?

हम उत्तराखंड के लोग, भारत के सबसे भाग्यशाली तथा ईश्वरीय आशीष से अनुग्रहीत हैं। मेरे लिए, इस देवभूमि पर जन्म लेना ही परम सौभाग्य की बात है। हजारों वर्षों से हमारे ऋषी-मुनियों ने अपने तप से इस पावन भूमि को कृतार्थ किया है। इसी वजह से हर वर्ष हजारों तीर्थयात्री यहां आकर अपने आप को धन्य समझते हैं।

जहां एक ओर उत्तराखंड इसके प्राकृतिक सौंदर्य तथा धार्मिक स्थलों के कारण प्रसिद्ध है, वहीं दूसरी ओर देवभूमि के पवित्र धरा ने ऐसे असंख्य वीर जवानों को जन्म दिया है जिन्होंने संपूर्ण भारत की रक्षा के लिए देश की रक्षा सेनाओं में अपनी सेवाएं प्रदान की है। इसलिए उत्तराखंड को देवभूमि के साथ-साथ वीरभूमि भी कहा जाता है। देखा जाए तो उत्तराखंड में वीरता और शौर्य की अविरल परंपरा रही है जहां प्रत्येक परिवार का लगभग हर तीसरा सदस्य देश की रक्षा सेनाओं में अपनी सेवाएं प्रदान करता है। आपके इस समर्पण एवं राष्ट्रभक्ति के भाव को शत-शत नमन एवं समस्त उत्तराखंड के लोगों के उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं देता हूं ।

• भविष्य में उत्तराखंड को किस रूप में देखना चाहते हैं या आपके सपनों का उत्तराखंड कैसा होना चाहिए?

मैं ऐसे उत्तराखंड के लिए कल्पना करता हूं जिसमें युवाओं, प्रतिभावानों तथा तकनीकी की उच्च भागीदारी हो एवं समाज का हर व्यक्ति भी यह महसूस करें कि यह उनका अपना प्रदेश हैं- जिसके निर्माण में उनकी आवाज का महत्व है।

ऐसे उत्तराखंड बनाने की कल्पना करूंगा जहां सबकी रजामंदी से निष्कर्ष लिया जाए तथा जिसमें महिलाओं की भागीदारी हो। ऐसे सतत् विकास की परिकल्पना करता हूं जहां गरीबी, बेरोजगारी, शराब, नशा,•ोदभाव, भ्रष्टाचार तथा पलायन का कोई स्थान न हो। ऐसा प्रदेश जिसके प्रत्येक व्यक्ति एवं स्थान अपनी शिष्टाचार एवं सुंदरता से देवभूमि को गौरवान्वित करें तथा दूसरे राज्य एवं देश इसका अ•िानंदन, वंदन तथा नमन करें। यह होगा मेरे सपनों का उत्तराखंड – ‘श्रेष्ठ, सुंदर एवं पवित्र’।

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