Exclusive सरोकार

रेलवे की सेहत सुधार रहा पहाड़ का बेटा

अभी कुछ तकलीफें, नतीजे बेहतरीन होंगे

अनुराग पुनेठा

भारतीय रेल एशिया का सबसे विशाल और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा नेटवर्क है, जहां 23,000 गाड़ियां हर रोज चलती हैं। रेलवे हर रोज तकरीबन ढाई करोड़ यात्री और 3 मिलियन टन सामान को एक छोर से दूसरे छोर तक ले जाती है। रेलवे के 13,00,000 कर्मचारी दिन-रात लगाकर इस विशाल नेटवर्क को चलाते हैं, रेलवे नेटवर्क अपनी तमाम विशालता के साथ-साथ कुछ खामियां लेकर भी चलता रहा है। पिछले कुछ वर्षों में रेलवे में आधुनिकीकरण का दौर चला है। मालगाडियों को लेकर एक अलग रेलवे लाइन, डीएफसी कोरीडोरद्ध, हाई स्पीड ट्रेनए यात्रियों को और बेहतर सुविधाएंए रेलवे में रोजगारए ये ऐसे तमाम मुद्दे हैं, जिन्हें लेकर रेलवे सुर्खियों में रहा है। 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद, जो महत्वपूर्ण काम हुआ, वह था रेलवे बजट को आम बजट के साथ जोड़ देना। अब रेल बजट अलग से पेश नहीं किया जाता। रेलवे में ये सभी बदलाव किस तरह से हैं, इन सब पर बातचीत करने के लिए हमने रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्विनी लोहानी से खास बातचीत की। लोहानी का रेलवे से पुराना जुडाव रहा है, वो एक तेज तर्रार ईमानदार और आगे की सोच रखने वाले व्यक्ति माने जाते हैं, वो जिन भी पदों पर रहे है, वहां उन्होने अपनी छाप छोडी है। मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड के मुखिया का पद हो, या फिर एयर इंडिया के चेयरमैन की जिम्मेदारी, अश्विनी लोहानी ने शानदार काम करके दिखाया है। वह रेलवे में पहले भी रहे हैं। पिछले साल अगस्त में उन्होने रेलबे बोर्ड के चेयरमैन का पद संभाला। उनके आने के बाद क्या कुछ बदलाव हुए, पेश है इसी पर उनसे बातचीत।

एयर इंडिया के चेयरमैन के पद से रेलवे बोर्ड का कार्यभाल एक तरह से आपकी घर वापसी हैए क्या कहना चाहेंगेए क्या बदलाव किए आपनेए अपने कार्यकाल को आप कैसे देखते है ?

मैं काफी संतुष्ट हूं। हमने महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। जब से रेलवे में आया हूं तब से कई चीजें को बदलने की कोशिश की है। रेलवे एक बड़ा आर्गेनाइजेशन है, 13 लाख लोगों का परिवार हैए हमने भ्रष्टाचार को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मैने गिफ्ट लेने की परंपरा को खत्म कर दिया है। हम एक कल्चर को बनाने की कोशिश कर रहे है। मैंने काम करने की एक नई पद्धति को विकसित करने की कोशिश की है। हमने रिफॉर्म्स का सिलसिला शुरू किया है। रेलवे में काफी परिवर्तन चल रहे हैंए रेलवे में कई महत्वपूर्ण काम हैं, जो ट्रैक पर आ गए हैं। डीएफसी होए अहमदाबाद.मुंबई के बीच में हाई स्पीड लाइनए रेल यूनिवर्सिटी हो यास्टेशनों का आधुनिकीकरणए और सबसे ज्यादा काम रेलवे की सुरक्षा पर ध्यान दिया गया है। स्टेशन पहले से बहुत साफ हुए हैंए सफाई के स्तर पर काम हुआ है। टेक्नोलॉजी का प्रयोग बढा है। काफी चीजों को किया जा रहा हैए तो कह सकता हूं कि काफी कुछ बदलाव किए गए हैं।

रेलवे की सुरक्षा की दिशा में काम हुआ है। एक्सीडेंट कम हुए है।क्या ये आपकी प्राथमिकता मे थाए आपने क्या किया ?
हमारा सबसे पहला फोकस सुरक्षा व्यवस्था पर रहा है।रेलवे एक ट्रांसपोर्ट आर्गेनाइजेशन हैए हमारी पहली प्राथमिकता रही है कि ट्रेन सुरक्षित चले। ट्रेनें चलाने से ज्यादा जरूरी है कि सुरक्षित चले। हमारी दिक्कत ट्रैक के रखरखाव की हैए इस पर हम समय नहीं दे पाते है। हम गाड़ियां ज्यादा चला रहे हैंए जो लगातार बढ़ती चली जा रही हैंए उसकी वजह से हम ट्रैक के मेंटेनेंस को टाइम नहीं दे पाते थेए उसको हमने बदलने की कोशिश की है। हमने मेंटेनेंस के लिए टाइम देना शुरू किया हैए ट्रैक की बदली हुई है एतकरीबन 4300 किलोमीटर के ट्रैक को बदल दिया गया है। पिछले साल ये आंकडा 2300 किमी का था।

डीएफसी कॉरीडोर की क्या स्थित है ?
पिछले कुछ साल में इतनी ज्यादा तादाद में ट्रेन बढ़ाई गई हैं कि ट्रैक पर बहुत लोड आ गया। अगर आप मुगलसराय वाले ट्रैक पर देखे हैं तो वहां 180 फ़ीसदी का लोड है। ट्रेन चलती रहेंगी तो मेंटेनेंस कब होगा। अगर हम मेंटेनेंस करते हैं तो सफर प्रभावित होता हम ट्रैक ठीक कर रहे हैं। उन्हें बदल रहे हैए डीएफसी पर काम तेजी से चल रहा है। अगले दो सालमें तैयार हो जाएगा। अभी ट्रेनों की समय पर चलने का काम प्रभावित हुआ हैए लेकिन हमारा कमिटमेंट है कि हम ट्रेनों की सुरक्षा और यात्रियों की सुरक्षा पर ध्यान दें।

पर मीडिया मे ट्रेनों की लेटलतीफी की खबरें ज्यादा हैण्ए लोग आलोचना कर रहे है ?
हां मै मानता हूं कि ये समस्या है।लेकिन हम ये कीमत चुका रहे हैं। पहली बार रेलवे की सेहत सुधारने की दिशा में काम समग्रता में हो रहा है। जैसा मैने कहा कि मेरा जोर लोगो की सुरक्षा पर है। लेकिन ये बात लोगो को समझनी होगी कि जितनी ट्रेनें हम चला रहे हैं उतनी ट्रेन चलाने की हमारी कैपेसिटी नहीं हैए विभिन्न कारणों से पिछले 10.15 साल में हम लगातार ट्रेनें बढ़ाते गए लेकिन हमारा इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ नहीं रहाए संसाधनो को बढ़ाने पर घ्यान नहीं दिया गया। दो चीजे हैंए या तो जैसे चल रहा है वैसे ही चलायेए समय पर ध्यान देए ट्रैक के रखरखाव को एक तरफ रख दें या भविष्य को देखते हुए अभी थोड़ा समझौता कर लें। इसका फायदा बाद में मिलेगाए हमने लंबा रास्ता चुना है। लोगो को हो रही तकलीफ के लिए मैं दुखी हूं। लेकिन यकीन मानियेए भविष्य के लिए यही बेहतर तरीका है।

कुछ लोग कहते है कि रेलवे आधुनिकीकरण के लिहाज से कई साल पीछे चल रही है। श्रीधरन साहब ने कहा है कि भारतीय रेलवे दुनिया की तमाम रेलवे की तुलना में लगभग 20 साल पीछे चल रही हैए क्या कहना चाहेंगे ?

श्रीधरन साहब खुद एक बड़े आदमी हैं, वह रेलवे में यहां पर भी रहे हैं, उनको भी ठीक करने का मौका मिला था। करना चाहिये थाए देखिए सवाल ये है कि भारतीय रेलवे के पास 23ए000 गाड़ियां हैंए जो हर रोज चलती है। तकरीबन ढाई करोड़ लोग हर रोज सफर करते हैं और 3 मिलियन टन माल हम हर रोज ढोते है। रेलवे एक सरकारी तंत्र है लेकिन हम एक कमर्शियल आर्गेनाइजेशन को चला रहे हैंए यह अपने आप में बहुत बड़ी बात है। इतनी बड़ी संस्था इतने बड़े स्तर पर दिन रात काम करती है। हम डिलीवरी दे रहे हैं, हांए कभी कुछ देरी होती है। रेलवे दिन रात बिना रूके काम करती है। हमको रिफार्म करना हैए हमको थोड़ा टेक्नोलॉजी केंद्रित बनाना हैए उस पर काम जारी है। इस पर सरकार ने बहुत जोर दिया है।

रेलवे की आमदनी कैसे बढेगीए कहां से आयेगा पैसाए फ्रेट के किराये भी एक तय सीमा तक ही बढ सकते है ?
आमदनी बढ़ाने का मुख्य जरिया है कि हम अपने टिकटों की कीमतें बढ़ायें। इसके अलावा कोई चारा नहीं है। हमारे किराए हास्यास्पद हैं। हमारे किराए बस के किराए से भी कम है। लेकिन अगर हमको रेलवे की सेहत सुधारनी है तो यात्री किराए में बढ़ोतरी करनी होगी। मालभाड़ा हम एक लिमिट तक ही बढ़ा पाएंगे।

तो क्या माना जाए कि आने वाले वक्त में यात्री किराये में बढ़ोतरी होने जा रही है ?
नहीए मुझे नहीं लगताकि कुछ साल ऐसा होगा। हालांकि यह फैसला सरकार को लेना है। लेकिन वो करना ही पड़ेगाए नहीं तो हम रेलवे को ही नुकसान पहुचाएंगे।

लोग कहते हैं कीमत तो वो देने को तैयार हैं लेकिन यात्रियों को सुविधाएं भी दी जाए ?
हम किराए के हिसाब से बहुत सुविधाएं दे रहे हैंए अगर आप देखेंगे तो पाएंगे कि किराए की तुलना में हम ज्यादा सुविधायें दे रहे हैं। पिछले वर्ष की तुलना में रेलवे मे लगातार सुविधाएं बढ़ी हैं। हम अब बहुत कुछ दे रहे हैं। रेलवे में सुविधाओं पर ज्यादा जोर है। पहले की तुलना में हम ज्यादा टिकट दे पा रहे हैं, हम टॉयलेट साफ दे रहे हैं, स्टेशनों की स्थिति में बहुत कुछ बदलाव आया है।

आप के आने के बाद खबर आई कि रेलवे लगभग 1,00,000 लोगों को रोजगार देने जा रही है। विदेशों में इसकी चर्चा है, कैसे करेंगे आप ?
हांए ये सही है कि हमने 1,00,000 लोगों के लिए रोजगार निकाले हैं, जिसमें ढाई करोड़ लोगों ने रोजगार के लिए अप्लाई किया है। यह दुनिया का सबसे बड़ा सलेक्शन प्रोसेस होगाए इसका काम चल रहा है मार्च तक हम उसके काम को पूरा कर लेंगे और उम्मीद है कि सब ठीक होगा। हमें स्टेशन गार्डए इंजीनियर्स की जरूरत है। रेलवे मे खाली होने वाली सभी जगह भरने की जरूरत है। हमें काफी कुछ बदलने की जरूरत है। हमें रेलवे की कार्य क्षमताए कार्य संस्कृति को बदलने की जरूरत है। हमें तकनीक के साथ जुड़ना होगा।

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की क्या प्रगति है, बहुत से लोग कहते है कि बुलेट ट्रेन के लिये पैसा बर्बाद करना ठीक नही है ?
यह नासमझी का बयान है। बुलेट ट्रेन का पैसा रेलवे से नहीं दिया जा रहा। बुलेट ट्रेन का पैसा जापान से आ रहा है और बहुत कम इंटरेस्ट पर। लगभग फ्री कीमत पर हो रहा है और यह समय की जरूरत है कि हम दो शहरों को जोड़ें। अहमदाबाद शहर के बीचोबीच से मुंबई शहर के बीचों बीच 2 घंटे में हम यात्रियों को पहुंचाएंगे। यह हवाई जहाज से संभव नहीं है। हवाई जहाज से दो शहरों के बीच की यात्रा में लगभग 5 घंटे लगते हैं। जो लोग इस बात को कहते हैं कि यह रेलवे के पैसे की कीमत पर हो रहा हैए वो गलत हैं। अगर हम यहां पर अच्छी सड़क बना रहे हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि हम गांव की सड़क बनाने के लिए दूसरी जगह की सड़क को काट रहे हैं। बुलेट ट्रेन के लिए दूसरी जगह से पैसा नहीं लिया जा रहा है।

गिफ्ट रोक देने से तो आपने बहुत सेलोगों को नाराज कर दिया होगा, ये तो वर्षों से होता आ रहा है रेलवे में। होली-दीवाली पर गिफ्ट देने की परंपरा रही है ?
नहींए ऐसा नहीं है। मैने महसूस किया है कि अच्छे काम को लोग पंसद करते है। यदि लोगों को यह लगे कि यह शख्स ईमानदारी से काम करता है, तो अच्छी चीजों को पसंद किया जाता है। भ्रष्टाचार हमेशा ऊपर से नीचे आता है। अगर बॉस ईमानदार होगा तो नीचे के कर्मचारी भी देर सबेर ईमानदार हो जाएंगे।

रेल बजट को आम बजट मे मिला देने से फायदा हुआ या नहीं ?
बजट को मिला देने से जो फायदा हुआए वह यह है कि अब रेलवे का फोकस रेलगाड़ियों की घोषणा करने पर नहीं होता। हमारी आवश्यकता है कि हम और गाड़ियां नही चलाएं। हमारी क्षमता नहीं है कि हम और गाड़ी चला सके। अगर हम समय की पाबंदी नही रख सकते। समय की कीमत पर यात्रियों की सुविधा की कीमत पर हम गाड़ियां नहीं चला सकते।

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