रायशुमारी से बजट की तैयारी

खुद मुख्यमंत्री ने अलग-अलग जगहों पर कार्यक्रम कर समाज के अलग-अलग वर्ग के लोगों से बजट पर उनकी राय जानी और भरोसा दिलाया कि इस बार का बजट उनकी उम्मीदों के अनुसार होगा।
हिल-मेल
मार्च में हो रहे उत्तराखंड के बजट सत्र की दो खास बातें हैं। पहला ये बजट सत्र और राष्ट्रपति का अभिभाषण गैरसैंण में पहली बार हो रहा है। गैरसैंण पर्वतीय जनता की उम्मीदों से जुड़ा हुआ है। दूसरा, राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पहली बार बजट से पहले प्रयोग के तौर पर जनता की भी राय शुमारी की है। मुख्यमंत्री ने अपने राज्य के लोगों से ये जानने की कोशिश कीकि राज्य के बजट से उनकी क्या अपेक्षाएं हैं। खुद मुख्यमंत्री ने अलग-अलग जगहों पर कार्यक्रम कर समाज के अलग अलग वर्ग के लोगों से बजट पर उनकी राय जानी और भरोसा दिलाया कि इस बार का बजट उनकी उम्मीदों का बजट होगा।
राज्य सरकार ने इस कार्यक्रम को नाम दिया ‘आपका बजट आपकी राय’। इसकी शुरुआत यमुनोत्री से हुई। यहां मुख्यमंत्री ने किसानों से मुलाकात कर बजट पर उनके सुझाव लिए। इसके बाद पिथौरागढ़ में महिलाओं से बजट पर रायशुमारी की गई। हल्द्वानी में पूर्व सैनिकों से मुलाकात का कार्यक्रम रखा गया। मुख्यमंत्री ने देहरादून में युवाओं से बजट पर सुझाव मांगें। पहाड़ की महिलाओं ने मुख्यमंत्री के साथ खुलकर अपने रोजमर्रा के जीवन से जुड़ी मुश्किलों को दूर करने के लिए बजट में जरुरी प्रावधान करने की बात कही। पहाड़ का कठिन जीवन जीने वाली महिलाओं ने मुख्यमंत्री से पहाड़ पर रोजगार बढ़ाने के लिए बजट में विशेष प्रावधान रखने की मांग की।मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पिथौरागढ़ में कहा कि वे अपनी बहनों-बेटियों के बीच हैं। उन्होंने यहां महिलाओं को कहा कि वे बजट को लेकर अपने सुझाव दें। हो सकता है कि कोई एक अमूल्य सुझाव यहां की तस्वीर बदल दे। उन्होंने महिलाओं को आश्वस्त किया कि उनके सुझावों का बजट में समावेश किया जाएगा।
पिथौरागढ़ –
पिथौरागढ़ में महिलाओं ने मुख्यमंत्री को अपने सुझाव दिए। महिला किसान रेखा भंडारी ने कहा कि हम बैंक से कृषि ऋण लेना चाहते हैं लेकिन हमारे नाम पर जमीन न होने से ऋण नहीं मिल पाता। इसी तरह महिला किसानों को फसल बीमा जैसी सुविधाएं भी नहीं मिल पातीं। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान से जुड़ी लक्ष्मी भट्ट ने कहा कि एक वर्ष में इस अभियान के तहत उत्तराखंड मे बेटियों की अच्छी प्रगति हुई है। इसलिए जो लोग इन अभियानों में कार्य कर रहे हैं उन्हें प्रोत्साहित किया जाए। स्वंय सेवी संस्था से जुड़ी कमला ने कहा कि हमारी महिलाएं सांस्कृतिक दल से जुड़ी हैं। वे सरकार अभियानों के लिए कार्य करती हैं। अगर वे इस कार्य के सिलसिले में दूरदराज जाएं तो उन्हें अच्छा मानदेय मिले और रहने की सुविधा मिले। कार्यक्रम ने छात्रा ने कहा कि बोर्ड परीक्षाओं मे दूसरी जगह सेंटर पड़ने पर आने जाने की सुविधा और आवासीय सुविधा मिले तो अच्छा हो। कुछ छात्राओं ने बालिका शिक्षा को डिटिटल बनाने, लड़कियों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने, स्मार्ट क्लासेस चलाने जैसे सुझाव रखे। छात्राओं ने कहा कि शिक्षा को केवल किताबी न बनाकर व्यवसायिक बनाया जाए। आशा कार्यकर्ताओं ने इस मौके पर मुख्यमंत्री से अपने वेतन बढ़ाने की मांग रखी। रेखी जोशी नाम की आशा कार्यकर्ता ने कहा कि वे गर्भवती महिलाओं की नौ महीने तक देखभाल करती हैं। परंतु उन्हें इसके लिए उचित मानदेय नहीं मिलता जिससे वे निराश रहती हैं। दुग्ध पालन से जुड़ी नीता मेहता ने इस व्यवसाय को अधिक बढ़ाने की बात कही। वहीं सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज की छात्रा स्नेहा ने मुख्यमंत्री को सुझाव दिया कि उन्हें वुमन इम्पावरमेंट सेल दिया जाए। जिससे लड़कियों को उनके अधिकारियों के बारे में जानकारी हो। इसके साथ ही स्नेहा ने अच्छे प्लेसमेंट के लिए करियर काउंसिलिंग क्लासेस शुरु करने की भी मांग की। स्वंय सेवी समूह चलाने वाली पार्वती ने मुख्यमंत्र से ऊन बैंक खोलने की मांग की ताकि इस पेशे से जुड़ी महिलाओं को उनकी मेहनत की अच्छी कीमत मिले।
देहरादून
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत दून विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों के बीच पहुंचे। दून विश्वविद्यालय के एक छात्र ने कहा कि वे कोऑपरेटिव सोसाइटी के ज़रिये राज्यभर में मवेशी से जुड़ी एक यूनिट बना सकते हैं। जिससे हर वर्ष आठ करोड़ रुपये की आमदनी हो सकती है और 6 लाख लोगों को रोजगार मिल सकता है। शिवम नाम के छात्र ने मुख्यमंत्री से कहा कि जिस तरह दूसरे राज्य इनवेस्टमेंट समिट के जरिये इनवेस्टमेंट हासिल कर रहे हैं, उत्तराखंड में भी ऐसे इनवेस्टमेंट समिट कराए जा सकते हैं। कुछ छात्रों ने मेडिशिनल एयरोमेटिक्स प्लांट्स के बड़े पैमाने पर उत्पादन कराए जाने और इसकी नर्सरी बनाने के सुझाव दिए। श्रुति नाम की छात्रा ने कहा कि पहाड़ में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़ी दिक्कत है। ऐसे में जो छात्र एमबीबीएस कर रहे हैं उनके लिए ग्रामीण जगहों पर जाकर ट्रेनिंग लेना आवश्यक किया जा सकता है। आरती नाम की छात्रा ने उत्तराखंड में पलायन की समस्या से निपटने के लिए सीमांत इलाकों में मेडिकल कॉलेज, आईआईटी या मैनेजमेंट कॉलेज खोलने का सुझाव दिया। अतुल नाम के छात्र ने पहाड़ में आए दिन होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए बजट में सड़क सुरक्षा पर अधिक पैसे खर्च करने का सुझाव दिया। यहां छात्राओं ने आशा वर्करों के लिए बेहतर मानदेय की भी बात रखी। मालती नाम की छात्रा ने कहा कि विभागों में तालमेल न होने की वजह से विकास प्रभावित होता है। एक जगह सड़क बनती है, फिर सीवर लाइन डालने के लिए उसे तोड़ दिया जाता है, सड़क फिर खराब हो जाती है। इसलिए सड़क की प्लानिंग अच्छी होनी चाहिए। देहरादून की रिस्पना नदी को पुनर्जीवित करने के लिए छात्रों ने रिस्पना रिवर फ्रंट बनाने का प्रस्ताव दिया। सौम्य नाम के छात्र ने कहा कि देहरादून हो या पिथौरागढ़, बजट में सभी जगहों के लिए समान वितरण की व्यवस्था होनी चाहिए। कुछ छात्रों ने किसानों को डिजिटल इंडिया से जोड़ने के सुझाव दिए। ताकि किसान अपनी उपज को सीधे बेच सके और किसी की मध्यस्थता का सहारा न लेना पड़े। पलायन रोकने के लिए छात्रों ने बेहतर कम्यूनिकेशन बनाने पर ज़ोर दिया ताकि सरकार की योजनाओं के बारे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को जानकारी मिल सके।
उत्तरकाशी
आपका बजट आपकी राय कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान जुटे। सबसे पहले तो उन्होंने चकबंदी नीति लागू करने की मांग की। किसानों ने कहा कि पहाड़ में खेत छितरे हुए हैं, एक जगह पर नहीं हैं, जिसके चलते किसी के पास 50 हेक्टेअर जमीन भी नहीं है। उन्होंने कहा कि चकबंदी से छितरे हुए खेत एक जगह पर आ जाएंगे। यहां किसानों पर्वतीय जिलों के लिए अलग कृषि नीति बनाने का सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि पर्वतीय इलाकों में भूस्खलन के बाद खेत किसी काम के नहीं रहते। पहाड़ और मदैन की कृषि भूमि में बहुत अंतर है। कुछ किसानों ने जंगली जानवरों से फसल को होने वाले नुकसान को रोकने के प्रयास करने की मांग रखी। किसानों ने कहा कि बंदरों या जंगली सूअरों के चलते उनकी फसल बर्बाद हो जाती है। इसलिए बजट में इस पर खास ध्यान दिया जाए।उत्तरकाशी किसान मोर्चा के अध्यक्ष ने कहा कि उनके किसान भी सेब और नाशपाती की अच्छी पैदावार करते हैं। नौगांव की फलपट्टी मशहूर है। उन्होंने हिमाचल की तर्ज पर उत्तराखंड के सेबों की मार्केटिंग का सुझाव दिया। साथ ही ये भी कहा कि किसानों से उनकी पैदावार खरीदने पर कोई कमीशन न लिया जाए। एक किसान ने ओला वृष्टि से होने वाले नुकसान को लेकर बजट में प्रावधान करने की मांग रखी। इसके साथ ही हॉर्टी कल्चर को बढ़ावा देने के सुझाव भी आए। सेब, टमाटर, मटर पर समर्थन मूल्य घोषित करने की मांग की कई। किसानों ने उत्तराखंड में फूलों की मंडी स्थापित करने के भी सुझाव दिए। उत्तरकाशी में रवांई घाटी के किसानों ने कृषि विज्ञान केंद्र खोलने की मांग की। अभी इस क्षेत्र के लोगों को चिन्यालीसौंड़ जाना पड़ता है। एक छात्र ने इस कार्यक्रम में कहा कि हर विद्यालय में कृषि विषय होना चाहिए। इससे युवाओं को कृषि के बारे में जानकारी मिल सकेगी।
हल्द्वानी
लोगों ने बजट से पहले मुख्यमंत्री से जनता की राय लेने के लिए शुक्रिया अदा किया। यहां लोगों ने पार्किंग सुविधा बढ़ाने की मांग की। हल्द्वानी की छात्राओं ने एनसीसी में लड़कियों के लिए और सीटें बढ़ाने की मांग की। व्यापारियों ने जीएसटी के बारे में लोगों को जागरुक करने के सुझाव दिए। युवाओं ने कहा कि स्वंय सहायता समूहों के लिए सिर्फ छोटे लोन न देकर बड़े लोन भी दिए जाएं।

Post Author: Hill Mail

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