कश्मीरीयुवाओं को सेना के लिए तैयार कर रहा यूथ फाउंडेशन

भटके कश्मीरी युवाओं को मुख्यधारा में लाने की सेना की अनोखी पहल

मनजीत नेगी, देहरादून

एक तरफ भारतीय सेना कश्मीर घाटी में आतंकियों का सफाया कर रही। मारे गए आतंकियों का आंकड़ा दोहरे शतक के पार जा चुका है। दूसरी तरफ सेना भटके हुए कश्मीरी युवाओं को देश की मुख्यधारा में लाने में जुटी हुई है। हम आपको सेना की एक ऐसी ही अनोखी पहल से रूबरू करा रहे हैं। कश्मीर घाटी से देहरादून घाटी में एलओसी से लगे उरी इलाके के युवा सेना में शामिल होने की ट्रेनिंग ले रहे हैं। दरअसल नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के प्रिंसिपल कर्नल अजय कोठियाल के नेतृत्व में यूथ फाउंडेशन ने ये कवायद शुरू की है।

उरी के दो युवा मोहम्मद शफकत और मोहम्मद तारिक देहरादून के यूथ फाउंडेशन कैंप में सेना में भर्ती होने की ट्रेनिंग ले रहे हैं। तीन महीने की इस कड़ी ट्रेनिंग के बाद ये दोनों कश्मीरी युवक जम्मू कश्मीर लाइट इंफ्रेंट्री में भर्ती होने के लिए तैयार होंगे। मोहम्मद तारिक इस ट्रेनिग से बहुत जोश में है और वो सेना में भर्ती होकर सीमा पार से आने वाले आतंकियों से मोर्चा लेना चाहता है। यहां ये दोनों कश्मीरी युवा यूथ फाउंडेशन के जिस कैंप में ट्रेनिंग ले रहे हैं वहां उत्तराखंड के दुर्गम इलाकों की लड़कियों की भी ट्रेनिंग चल रही है। सेनाओं में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है। लड़ाकू विमान उड़ाने से लेकर लड़कियां हर मोर्चे पर हाथ आजमा रही हैं। ऐसे में सेना में करियर बनाने का सपना देख रही पहाड़ की बेटियों को तीन महीने की ये खास ट्रेनिंग दी जा रही है।

तीन महीने की ये ट्रेनिंग पूरी तरह से आर्मी के मायनों के मुताबिक दी जा रही है। सुबह 6 बजे से ट्रेनिंग का सिलसिला शुरू होता है जो देर शाम तक चलता है। चिन-अप, रस्सी पर चढ़ना-उतरना और लांग जंप हर तरह के मुश्किल से मुश्किल प्रशिक्षण से सभी को गुजरना है। सेना के पूर्व प्रशिक्षक के साथ ही नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की महिला प्रशिक्षक इस कैंप में लड़कियों को ट्रेनिंग दे रही हैं। यह ट्रेनिंग कितनी कठिन है इसका अंदाजा इसी बात से चल जाता है कि आतंकी हमले के तौरान रूम इंटरवेंशन ड्रिल भी इन लड़कियों से कराई जा रही है। इसमें लड़कियां बांस के डंडे के सहारे 30 फ़ीट ऊंची दीवार पर चढ़ती हैं।

इस कैंप को चलाने वाले कर्नल अजय कोठियाल का कहना है, ट्रेनिंग से लड़कियां भी सेना में भर्ती होकर अपना दम खम दिखा सकेंगी। केदारनाथ आपदा के बाद पुनर्निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले कर्नल कोठियाल ने इससे पहले उत्तराखंड में जगह-जगह ट्रेनिंग कैंप शुरू कर उत्तराखंड के सैकड़ों युवाओं को सेना में शामिल होने की राह दिखाई है। पिछले 3 साल में 2000 से ज्यादा स्थानीय युवा गढ़वाल और कुमाऊं रेजीमेंट में भर्ती हो चुके हैं। अब वह देवभूमि की बेटियों और कश्मीर के युवाओं को देश सेवा की राह पर ले जा रहे हैं।

भाड़े के आतंकियों ने कश्मीर में बहुत गंदगी फैलाई है। मैं चाहता हूं कि हमारा कश्मीर अच्छा बने। मैं फौज में भर्ती होकर कम से कम दस आतंकी मारना चाहता हूं।
-मोहम्मद तारिक

यहां यूथ फाउंडेशन के कैंप में आर्मी में भर्ती होने की बेसिक ट्रेनिंग मिल रही है। हम बॉर्डर के इलाके में रहते हैं। वहां बहुत परेशानी हैं। सेना ने उरी से हमें यहां भेजा है।
– मोहम्मद शफकत

पिछले दो महीने से ये लड़के यहां ट्रेनिंग कर रहे हैं और अभी हमें कश्मीर से 15 लड़कों का आवेदन आया है कि वे हमारे ट्रेनिंग कैंप में आना चाहते हैं। यहां से ट्रेनिंग के बाद ये भारतीय सेना में शामिल हो सकते हैं। आने वाले दिनों में हम कश्मीर के युवाओं के लिए एक अलग कैंप भी खोल सकते हैं।
– कर्नल अजय कोठियाल, प्रिंसिपल निम

Post Author: Hill Mail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *