साहसिक पर्यटन का नया ठिकाना जोशियाड़ा झील

वाटर स्पोर्ट्स से मनेरी भाली जल विद्युत परियोजना की खाली झील में छाई रौनक
वर्षा सिंह, उत्तरकाशी
20 और 21 जनवरी को उत्तरकाशी के जोशियाड़ा झील की तस्वीर कुछ और ही थी। पानी की लहरों की सवारी करने के लिए झील में नावें तैनात थीं। जोशियाड़ा में ऑल इंडिया कैनोइंग एवं कयाकिंग स्प्रिंट चैम्पियनशिप का आयोजन हो रहा था। रुड़की,हरिद्वार,बंगाल और हरियाणा से आई टीमों ने इस प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लिया।जब जोशियाड़ा झील की लहरों पर नाविक अपनी नावों को लेकर सवार हुए तो उत्तराखंड के पर्यटन के नक्शे पर संभावनाओं से भरी एक खूसबसूरत और रोमांचकारी तस्वीर उभर आई।
उत्तरकाशी में धार्मिक पर्यटन के साथ साथ एडवेंचर टूरिज्म यानी साहसिक पर्यटन की भी बेहतरीन संभावनाएं हैं। इन्हें हकीकत में उतारने के लिए ही इस बार माघ मेले में वाटर स्पोर्ट्स भी कराए गए। इसके लिए मनेरी भाली परियोजना की जोशियाड़ा झील को चुना गया। वाटर स्पोर्ट्स से मनेरी भाली जल विद्युत परियोजना की खाली पड़ी झील में मानो रौनक छा गई। वाटर स्पोर्ट्स के लिए ज़िलाधिकारी डॉ आशीष चौहान की पहल पर टिहरी झील विशेष परिक्षेत्र प्राधिकरण से वाटर स्पोर्ट्स की टीम साजो सामान के साथ उत्तरकाशी आई। स्पीड बोट,पावर स्पोर्ट्स बोट,साधारण बोट का ट्रायल लिया गया। बोटिंग के लिए झील में 200, 400 और 500 मीटर का दायरा तय किया गया। खेल के लिए जिलाधिकारी आशीष कुमार चौहान ने एक हफ्ते का प्रशिक्षण कार्यक्रम भी कराया। जिसमें कयाकिंग,कनोइंग,स्लैलम जैसे वाटर स्पोर्ट्स का प्रशिक्षण दिया गया। कयाकिंग के प्रशिक्षण के लिए स्कूली बच्चों को भी शामिल किया गया। ताकि ये बच्चे प्रशिक्षित होकर कयाकिंग वाटर स्पोर्ट्स को करियर के तौर पर अपना सकें।

वाटर स्पोर्ट्स के लिए बेहतरीन है जोशियाड़ा झील
प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लेने आए खिलाड़ियों को भी जोशियाड़ा झील खूब भायी। उनके मुताबिक यहां रुका और बहता पानी एक साथ होने की वजह से ये वाटर स्पोर्ट्स के लिए बेहतरीन साबित हो सकती है। झील के दोनों ओर सड़क है जिससे यहां तक पहुंचना भी आसान था। कैनोइंग,कयाकिंग,स्लैलम और राफ्टिंग के लिए जोशियाड़ा और मनेरी झील शानदार डेस्टिनेश साबित हुई।

क्या है कयाकिंग,कैनोइंग, स्लैलम
रोमांच के लिए पूरी दुनिया में मशहूर कैनोइंग और कयाकिंग को भारत के लिए एक नया खेल कह सकते हैं जो 1986 से यहां शुरू हुआ। इसीलिए इस खेल को लेकर अभी बहुत ज्यादा जागरुकता भी नहीं है। कैनोई एक तरह की खुली नाव को कहते हैं जिसमें घुटने को मोड़ कर एक सिंगल ब्लेड वाली पैडल चलानी होती है। जबकि कयाकिंग एक हल्के वजन की क्राफ्ट है जिसमें डबल ब्लेड वाली पैडल चलानी होती है।
ये बोटिंग गेम हैं, जिसमें 200, 500, 1000 मीटर, 5 किमी और 21 किमी इसी तरह की अलग अलग दूरी के आधार पर पानी में बोट और पैडल के साथ रेस होती है। रेस में अप स्ट्रीम और डाउन स्ट्रीम यानी चढ़ती हुई लहरें और उतरती हुई लहरों के खतरनाक पड़ाव बीच-बीच में आते हैं। पानी में लहरों के इन खतरों का सामना करते हुए खिलाड़ी को लक्ष्य तक पहुंचना होता है।
ओलंपिक में इस खेल के लिए 16 मेडल होते हैं जबकि एशियाई खेलों में कैनोइंग और कयाकिंग के लिए 35 मेडल होते हैं। कयाकिंग में के1 (सिंगल खिलाड़ी), के2 (2 खिलाड़ी), के4 (4 खिलाड़ी यानी टीम इवेंट) जैसी श्रेणियों में खिलाड़ी हिस्सा ले सकते हैं। इसी तरह कैनोइंग स्लैलम में सी1 (सिंगल खिलाड़ी),सी2(2 खिलाड़ी) की तर्ज पर श्रेणियां होती हैं। बोट के आकार भी खेल के मुताबिक अलग अलग होते हैं।

पर्यटन और रोजगार की संभावनाएं
जोशियाड़ा झील में वाटर स्पोर्ट्स के आयोजन से उत्तरकाशी और उत्तराखंड को दो सीधे फायदे हैं। साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में उत्तराखंड संभावनाओं से भरपूर है। राफ्टिंग,कयाकिंग और स्लैलम जैसे वाटर स्पोर्ट्स के ज़रिये उत्तरकाशी में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तो स्थानीय युवाओं केलिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। इसी सोच के साथ ज़िलाधिकारी डॉ आशीष चौहान ने इस बार माघ मेले में वाटर स्पोर्ट्स का ट्रायल लेने की कोशिश की। जो कि सफल रही और अब आगे भी ये आयोजन जारी रहेंगे।

जल क्रीड़ा के साथ एयर एडवेंचरभी
उत्तरकाशी के ज़िलाधिकारी डॉ आशीष चौहान वाटर स्पोर्ट्स के सफल आयोजन के बाद पर्यटन को मजबूत करने के लिए एक और नए प्रयोग पर आगे बढ़ रहे हैं। उत्तरकाशी में भविष्य में एयर स्पोर्ट्स के बारे में भी योजना बनाई जा रही है। डीएम आशीष चौहान के मुताबिक यहां पैराग्लाइड क्लब बनाया जाएगा। इसके लिए पैराग्लाइड प्रशिक्षकों को बुलाकर स्थानीय बेरोजगारों को प्रशिक्षण देने की योजना भी बनाई गई है। इन खेलों से पहाड़ों की रौनक बढ़ेगी। रोमांच बढ़ेगा। रोजगार बढ़ेगा।

उत्तराखंड में साहसिक खेलों की संभावनाएं
उत्तराखंड सरकार 13 जिले 13 डेस्टिनेशन की तर्ज पर हर जिले में नए पर्यटन केंद्र विकसित करने की योजना पर कार्य कर रही है। उत्तरकाशी भी साहसिक पर्यटन और खेलों का बेहतरीन केंद्र साबित हो सकता है। यहां इंटरनेशनल वाटर गेम्स आयोजित कराए जा सकते हैं।
ये खेल स्थानीय युवाओं को रोजगार देने में सक्षम हैं। इनकी मदद से पहाड़ की सबसे बड़ी समस्या पलायन से भी निपटा जा सकता है। रोजगार की तलाश में पहाड़ के जवानों को अपना घर अपने गांव को छोड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उत्तराखंड में ग्रीष्मकाल में जब चारों धामों की यात्रा के बाद शीतकाल के लिए कपाट बंद हो जाते हैं। अब शीतकाल में भी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इसी बात को ध्यान में रखकर बीते वर्ष 2017 अक्टूबर में भारतीय नौसेना ने ऋषिकेश से लेकर औली तक चार जिलों को छूती हुई करीब 600 किलोमीटर की साइकिल रैली निकाली। रैली का उद्देश्य शीतकालीन पर्यटन की संभावनाओं को तलाशना था।
मंदिरों के साथ उत्तराखंड में झरने,पहाड़,जंगल है जो साहसिक खेलों में रुचि रखने वालों के लिए एक शानदार डेस्टिनेशन हो सकते हैं। राज्य में स्कीइंग, रॉक-क्लाइम्बिंग, रैपलिंग, स्नोमेकिंगस, कैपिंग, जुमारिंग, रीवर क्रॉसिंग, पैरासेलिंग, पैराग्लाइडिंग, बंजी जंपिंग, एलिफेंट सफारी के लिए अपार संभावनाएं हैं। औली में हर साल आयोजित होन वाले विंटर गेम्स का खिलाड़ी सालभर इंतज़ार करते हैं। औली में सर्दियों में इंटरनेशनल स्कीइंग चैंपियनशिप भी करायी जाती है।
प्रकृति की अनुपम छटा के साथ यहां के ताल,झरने,पहाड़ियां,जंगल पर्यटकों के लिए प्रकृति के साथ समय बिताने का एक खूबसूरत बहाना हो सकते हैं।साहसिक खेल यहां संभावनाओ से भरपूर हैं। औली की बर्फ़ की चादर स्कीइंग के लिए विदेशी सैलानियों को खूब भाती है तो यहां हिमालय की चोटी पर ट्रैकिंग के लिए दुनियाभर से पर्वतारोही आते हैं। सिर्फ ट्रैकिंग के लिए उत्तराखंड देश के बड़े एडवेंचर स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन में से एक है। बेदनी बुग्याल,कौरी पास,हर की दुन,देवरिठाल-चंद्रशिला,डोडीताल,रूपकुंड,हेमकुंड और केदारकंठ यहां के सबसे लोकप्रिय ट्रैकिंग रूट हैं।
ऋषिकेश वाटर स्पोर्ट्स के लिए राज्य का ही नहीं,देश के सबसे बड़े डेस्टिनेशन में से एक है। टिहरी झील में वाटर स्पोर्ट्स बेहद लोकप्रिय है। उत्तरकाशी में वाटर स्पोर्ट्स के लिए जोशियाड़ा झील को तैयार कर राज्य में पर्यटन का एक और नया मार्ग खुला है।
कैनोइंग ने बदली जिसकी जिंदगी
नाम है राजू रावत। कोटद्वार के रहने वाले राजू दो साल तक कैंसर जैसी घातक बीमारी से जूझते रहे। मौत को मात देने के बाद वे पानी की लहरों पर दोबारा सवार हुए और हाल ही में नेशनल कैनोइंग चैंपियनशिप में चार स्वर्णपदक के साथ सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का खिताब जीता।
राजू उत्तरकाशी में आयोजित हुई नेशनल कैनोइंग स्पर्धा में 500 वर्ग मीटर में पहला स्थान हासिल किया। कैनोइंग ने राजू की जीने की वजह दी। वे इस समय सेना की बीईजी रुड़की में हवलदार के पद पर तैनात हैं। राजू रावत कैनोइंग के 200, 500 और 1000 वर्ग मीटर स्पर्धा में अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कई मेडल जीत चुके हैं। वर्ष 2013 में उज्बेकिस्तान में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उन्होंने दो कांस्य पदक जीता। वर्ष 2014 के एशियन गेम्स में पांचवां स्थान हासिल किया। वर्ष 2015 में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप में राजू ने सेमीफाइनल में जगह बनाई।
इसी दौरान राजू को कैंसर होने का पता चला। जिसके चलते वे दो वर्ष तक इस खेल से दूर रहे। बीमारी को मात देने के बाद कैनोइंग में उन्होंने एक बार फिर अपनी दमदार वापसी की। इसी महीने भोपाल में आयोजित कैनोइंग की नेशनल चैंपियनशिप में राजू ने 4 स्वर्ण पदक जीतकर सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का खिताब हासिल किया।जोशियाड़ा झील में वाटर स्पोर्ट्स की संभावनाओं को लेकर राजू बेहद खुश हैं। इससे पहाड़ के युवाओं को कुछ कर दिखाने का मौका मिलेगा। राजू कहते हैं कि समुद्र सतह से अधिक ऊंचाई पर होने की वजह से यहां ऑक्सीजन कम है और खिलाड़ियों को ज्यादा जोर लगाना पड़ता है। यूरोप जैसी जगहों पर होने वाली कैनोइंग प्रतिस्पर्धा में ऐसी ही परिस्थितियां होती हैं। ऐसे में उत्तरकाशी में प्रशिक्षण हासिल करने वाले खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में बेहतरीन प्रदर्शन कर सकते हैं।

——–
जिस तरह टिहरी झील में वाटर स्पोर्ट्स के जरिये युवाओं को रोजगार मिला है वैसे ही जोशियाड़ा झील में भी वाटर स्पोर्ट्स रोजगार के अवसर पैदा होंगे। स्थानीय युवाओं के पास एक नया क्षेत्र उपलब्ध होगा जिसमें काम कर वे न सिर्फ अपना बल्कि राज्य के लिए बेहतर कर सकेंगे। अगली चारधाम यात्रा के दौरान पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी। उस समय वाटर स्पोर्ट्स पर्यटकों के आकर्षण का बड़ा केंद्र होंगे। धार्मिक पर्यटन के साथ जिले में साहसिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। सीमांत क्षेत्र के लोगों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। ताकि उनके लिए रोजगार के अवसर बढ़ें।
– डॉ आशीष चौहान, जिलाधिकारी उत्तरकाशी

उत्तराखंड में साहसिक खेलों को लेकर अपार संभावनाएं हैं। यहां के युवा प्रकृति के साथ बड़े होते हैं। अगर हम सिर्फ पर्यटन को लेकर ही आगे बढ़ें तो भी उत्तराखंड के लिए ये वरदान साबित हो सकता है। राज्य के युवा अपने ही जिलों मे रोजगार के बेहतर अवसर हासिल कर सकते हैं। इससे पलायन रोकने में भी मदद मिलेगी। अगर उन्हें अपने ही क्षेत्र में बेहतर काम और बेहतर पैसे मिले तो वे चंद पैसों की नौकरी के लिए देहरादून या दिल्ली की ओर नहीं जाएंगे।
– कर्नल अजय कोठियाल, प्रधानाचार्य, नेहरु पर्वतारोहण संस्थान

Post Author: Hill Mail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *