सरहद पर तैनात एस.एस.बी. की महिला जांबाज

IMG-20160603-WA0004उस देश की सरहद को कोई छू नही सकता जिस देश की सरहद पर निगेहबान है आँखें। जी हां, हम बात कर रहे है सीमा की महिला पहरेदारों की। हाथो में बंदूक लिए एस.एस.बी. महिला जवान दिनरात सीमा की रखवाली में तैनात हैं। एस.एस.बी. देश की पहली पैरा मिलिट्री फोर्स है जिसने सबसे पहले महिला जवानों की भर्ती की और उन्हें सरहद पर तैनात किया।

भारत नेपाल के बीच खुली सीमा है और ये तकरीबन 1750 किलोमीटर में फैली हुई है। यहां से कभी भी कोई भी कहीं भी बिना रोक टोक आ जा सकते हैं। इसी खुली सीमा का फायदा उठाते है, आतंकवादी और संदिग्ध अपराधी। जी हां और ये कोई खेल नया नहीं है, पिछले डेढ़ से दो दशक पहले से ये खेल चल रहा है। बावजूद इसके भारत इस पर अभी तक इस पर लगाम नहीं लग सका है। लेकिन अब एस.एस.बी. यानी सशस्त्र सीमा बल की महिला जवानों की मुस्तैदी से देश विरोधी गतिविधियों पर रोक लगी है। भारत नेपाल सरहद की निगरानी कर रही हैं एस.एस.बी. की महिला पहरेदारों से मनजीत नेगी की ग्राउंड जीरो रिपोर्ट।

IMG-20160603-WA0001हम यूपी के बहराइच जिले में मौजद रूपेड़िया बॉर्डर पोस्ट पर पहुंचे। नेपाल से लगने वाली ये बार्डर पोस्ट सबसे व्यस्त रास्तों में से एक है। 500 गाड़ियां और करीब 10 हजार लोग लोगों का रोज यहां से आना जाना होता है। रूपेड़िया का मतलब होता है रूपये का ढेर इससे समझ सकते हैं कि भारत नेपाल के बीच का ये आधिकारिक व्यापारिक रास्ता कितना अहम हैं। नेपाल में भूकंप के बाद मानव तस्करी का खतरा कई गुना बढ़ गया है। साथ ही काफी समय से आतंकी घुसपैठ का भी खतरा बढ़ा है। अफीम, चरस, ब्राउन शुगर इसके अलावा जानवरों की खाल और मंहगी जड़ी बूटी की तस्करी होती है। रूपेड़िया पोस्ट पर तैनात एसए एस.एस.बी. की महिला जवानों की टीम की लीडर इन्स्पेक्टर मुन्नी देवी की माने तो भारत नेपाल की खुली सीमा पर ये महिला जवान दिन रात ड्यूटी करती हैं। जो भी सीमा से होकर गुजरने वाला है उसकी चेकिंग करती है।

असिस्टेंट कमांडेंट रवि शंकर कुमार कंपनी कमांडर के मुताबिक रात के वक्त भी पेट्रोलिंग में भी महिला जवान किसी से कम नहीं हैं। रात में पेट्रोलिंग पर निकलने से पहले कंपनी कमांडर की ब्रीफिंग होती है। जिस इलाके में जाना है उसके बारे में बताया जाता है। रात में किन बातों का ध्यान रखना है और कैसे पेट्रोलिंग पर आगे बढ़ना है। भारत और नेपाल की सभ्यता और संस्कृति लगभग एक सी होने के चलते सदियों पूर्व हुए विशेष समझौते के कारण खुली सीमा होने के नाते और भारत नेपाल के बीच रोटी बेटी का सम्बन्ध है। जिससे सीमा पर आने जाने वालों को चेकिंग के वजह से खास कर महिलाओं के लिए खासा परेशानियों का सामना करना पड़ता था, और इसी वजह से कई बार सीमा पर तस्करी करने वाली लडकियां इसका फायदा उठा लेती हैं।

IMG-20160603-WA0005इसके साथ ही दोनों देशों के बीच बेहतर तालमेल के लिए नेपाल की महिला जवानों के साथ जॉइंट पेट्रोलिंग की जाती है। इस जॉइंट पेट्रोलिंग की मदद से स्थानीय लोगों में भरोसा कायम करना है। लेकिन जब से एस.एस.बी. महिलाओं जवानों को तैनात किया है, तब से सीमा पर इस तरह के मामले कम हो गए है। तकरीबन 2008 से महिला जवानों को यहां पर लगाया गया है।  ये महिलायें पूरी ईमानदारी से तत्पर होकर अपनों से दूर रह कर सीमा की रक्षा करती है। सुबह 6 बजे से बॉर्डर पोस्ट पर निगरानी और चेकिंग का काम शुरू हो जाता है। एस.एस.बी. की महिला जवान सादे कपड़ों में चेकिंग का काम करती हैं।

IMG-20160603-WA0006अब आइये आपको ले चलते है, महिलाओं के कैम्प में जहां पर खेतांे और सीमा के बीचों बीच इनका कैम्प बनाया गया है। यहां पर जैसे ही सीटी बजती है। वैसे ही लडकियां तुरंत ही अपने मोर्चे पर लग जाती है और उनकी निगाहें बंदूक की नली और दिमाग और उंगली बंदूक की टिगर पर होती है। ये कैम्प की रक्षा के साथ साथ बार्डर की रक्षा भी यही से करती है। इन महिला जवानों की ड्यूटी यही खत्म नहीं होती, ये पूरे बार्डर पर दिन में गस्त करती है। सिपाही कमला की मानें तो कांबिंग कर ये सीमा की सुरक्षा करती हैं। देश की इन महिला पहरेदारों के मुताबिक ये किसी भी मोर्चे पर अपने पुरुष साथियों से कम नहीं हैं।

नेपाल की महिला सुरक्षा कर्मियों के साथ एस.एस.बी. की महिला जवान जॉइंट पेट्रोलिंग करती हैं। सरहद पर निगरानी के दौरान अगर महिला टुकड़ी पर कोई हमला होता है कैसे अपना बचाव करना है। सीमा पर ये चलते चलते किस तरह अपने जान को हथेली पर रख कर चैकन्ने होकर सीमा की रक्षा करती है, और कुछ भी हरकत होते ही दौड़ कर मौर्चे पर तैनात हो जाते है। अपनी पोजीशन लेकर सीमा की रक्षा के साथ वहां आस पास के रहने वाले लोगों की जान माल की भी रक्षा करती है। ये है हमारी देश की महिला जवान जो कि अपनों से दूर होकर लड़की होने के बावजूद देश के प्रति देश भक्ति का जज्बा उन्हें फौज में खीच लाया, और ये तब से यहां पर सीमा की रक्षा करती है, और अब यही इनका परिवार है।

IMG-20160603-WA0002भारत नेपाल की खुली सीमा जहां आए दिन तश्करी का खेल हो या फिर आतंकवादियों के आने जाने की बात आम सी हो गई है। आपको बता दें कि इस खुली सीमा का खेल ये कोई नया नहीं है। पिछले डेढ़ सो दो दशक पहले से इस सीमा पर आतंकवादी गतिविधियां हमेशा से ही तेज रही है। उसी के साथ साथ चल रहा है, तश्करी का खेल। सशस्त सीमा बल की पहली महिला महानिदेशक अर्चना रामासुंदरम ने खास बातचीत में कहा कि नेपाल सीमा से मानव, नशीले पदार्थों और जाली नोटों की तस्करी करने वालों पर अंकुश लगाने की मुहिम को तेज किया जा रहा। साथ ही सीमा से सटी चैकियों को बहुत जल्द आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एस.एस.बी. में महिला जवानों की संख्या न सिर्फ बढ़ाई जाएगी बल्कि उन्हें चुनातीपूर्ण दायित्व भी दिए जाएंगे।

उस समय से लेकर भारत नेपाल की खुली सीमा की कमान एस.एस.बी. के हाथों में सौप दी गई थी कि अब वहां इस सीमा से कोई भी आतंकवादी गतिविधियां हरकत नहीं होंगी। 2008 में 800 महिलाओं को एस.एस.बी. में भर्ती किया गया। हमारी देश की महिलाएं, जो कि देश की रक्षा के लिए अपनों से दूर होकर सीमा की रक्षा करती है, गर्मी बरसात सर्दी, इस चिलचिलाती धूप में और गर्म हवाओं के झोके होने बावजूद ये उसी में सीमा की काम्पेनिंग करती है, और कई किलोमीटर चल कर सीमा पर पैनी नजर बनाती है। इनके इस जज्बे को आज पूरा देश सलाम करता है।

मनजीत नेगी, भारत नेपाल सीमा, रूपेड़िया

This entry was posted on Friday, June 3rd, 2016 at 3:42 pm and is filed under समाचार, हमारी फ़ौज. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0 feed. You can leave a response, or trackback from your own site.

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