अतुलनीय योगदान के लिए मनोज इष्टवाल को मिला उत्तराखंड फिल्म फेयर अवार्ड 2014

Uttarakhand Film Fear Award 2014उत्तराखंड फिल्म एसोसिएशन के पांचवें फिल्म फेयर अवार्ड में 27 विगत वर्षों से क्षेत्रीय भाषा में एल्बम (ऑडियो वीडियो) निर्माण, फीचर फिल्मों में अभिनय व प्रोडक्शन कार्य व इष्टवाल सीरीज नामक कंपनी से स्वयं का प्रोडक्शन हाउस चलाने तथा प्रदेश भर के विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों लोक उत्सवों और जनजातीय क्षेत्र पर पत्रिकारिता के रूप में शोध परक फ्रीचर स्टोरी लिखने एवं बनाने, वृतचित्रों का निर्माण एवं निर्देशन करने के लिए वरिष्ठ पत्रकार मनोज इष्टवाल को वर्ष 2014 का उत्तराखंड फिल्म फेयर अवार्ड (युफा अवार्ड) सम्मानित किया गया।

मनोज इष्टवाल वर्ष 1987 से लेकर वर्तमान तक मीडिया व लेखन से जुड़े हैं। वह पिछले 27 वर्षों से अनेक प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े रहे है उन्होंने अपनी पत्रिकारिता से देश भर की कई प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में उत्तराखंड प्रदेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण फ्रीचर स्टोरी लिखी हैं वहीं इलेक्ट्राॅनिक मीडिया के विभिन्न समाचार चैनलों से जुड़कर भी उन्होंने कई वृत्तचित्र व फ्रीचर टेलीकास्ट भी करवाए हैं। उन्होंने अनेक चैनलों से जुड़कर न सिर्फ उत्तराखंड प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों पर धारदार फ्रीचर स्टोरी की बल्कि लोकसंस्कृति और हिमालय व हिमालयी पर्यटन से जुड़े कई शोधपरख विषयों पर वृत्तचित्र निर्माण कर उनका विभिन्न समाचार चैनलों से प्रसारण भी करवाया।

Manoj Istwalजब उनसे इस अवार्ड के बारे में पूछा गया तो उनका जवाब था उत्तराखंड फिल्म फेयर अवार्ड ….मेरे उन मित्रों व रिश्तेदारों को समर्पित है जो कठिन घड़ी में मेरे साथ खड़े रहे…! मैं विस्मित और आश्चर्यचकित हूँ कि जिस एसोसिएशन का गठन हम चंद मित्रों ने सुनील नेगी (युफा के अध्यक्ष) के कार्यलय में आज से लगभग 15-16 साल पहले किया था और उसका पंजीकरण करवाया था आज उसी ने मुझे सम्मान लायक समझा। थैक्स उत्तराखंड फिल्म एसोसिएशन….!

उन्होंने कहा मैं यह पुरस्कार स्वाभाविक तौर पर अपने स्व. पिताजी, ताऊ जी, ताई जी, चाचा जी चाची जी को समर्पित करना चाहता था लेकिन उन्हें क्या समर्पित करने लायक मैं हूँ भी…? यह सोच पैदा होते ही मुझे लगा कि यह पुरस्कार मुझे मेरे उन मित्रों व रिश्तेदारों को समर्पित जो कठिन घड़ी में मेरे साथ खड़े रहे…! युफा अवार्ड जैसे कोई सपना देखा हो….! ये 27 साल कब गुजरे मुझे पता भी नहीं चला आज जब युफा अवार्ड 2014 से सम्मानित हुआ तो पलटकर अपनी कुंडली टटोली तब ज्ञात हुआ कि इस क्षेत्र में काम करते करते मैंने अपनी जिंदगी के 27 साल दे दिए हैं। सच में हैरत हुई कि ये साल भी कितने छोटे होते हैं यार…क्या मैं इतना बूढ़ा हो गया हूँ।

हिलमेल ब्यूरो

Post Author: Hill Mail

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