‘‘रवांई कल आज और कल’’

front page‘रवांई कल आज और कल’ पुस्तक के माध्यम से जानिये, उत्तराखंड के सबसे समृद्ध सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत वाले क्षेत्र रवांई (इसके अंतर्गत नौगाँव, पुरोला और मोरी विकास खंड आते हैं और यहाँ रवांल्टी भाषा बोली जाती है जो उत्तराखंड में बोलने वालों की तीसरी सबसे बड़ी संख्या है) रवांई-जौनपुर (पिछड़ा क्षेत्र घोषित है) इसी से लगा हुआ क्षेत्र है जनजाति क्षेत्र जौनसार-बावर इसमें कालसी व चकराता विकासखंड आते हैं। ये सभी क्षेत्र यमुना व टौंस घाटी में बसे है जिस कारण इनकी बोली अलग-अलग होने के बावजूद यहाँ मिली जुली सांस्कृतिक विरासत है।

यहाँ आज भी संयुक्त परिवार प्रथा है। यहाँ यमुना घाटी में पांडवों की पूजा होती है तो दूसरी ओर की टौंस घाटी में कौरव पक्ष के कर्ण जैसे योद्धा की पूजा होती है। यहाँ कर्ण के मंदिर है। यहाँ बकासुर व वाणासुर जैसे राक्षस पक्ष के योद्धाओं की भी पूजा होती है। जिसके आस्था के अपने की धार्मिक तर्क हैं।

इस क्षेत्र में लोगों ने अपनी मेहनत से कृषि व बागवानी के क्षेत्र बेहद अच्छी प्रगति की है बावजूद इसके यहाँ सरकारी मदद बेहद कम मिल पा रही है। 30 मई 1930 को यहाँ यमुना के किनारे तिलाडी मैदान में टिहरी नरेश के बजीर चक्रधर जुयाल ने अपनी मांग के लिए सभा कर रहे निहत्थे किसानों पर फौज से गोलियां बरसाकर सैकड़ों किसानों को मौत के घाट उतार दिया था जिसे उत्तराखंड के जलियाँ वाले बाग के नाम से भी जाना जाता है। इस काण्ड के बजीर चक्रधर जुयाल व डीएफओ पद्मदत्त रतूड़ी प्रमुख खलनायक थे। इस  काण्ड की ऐतिहासिक व दुर्लभ जानकारी भी इस  पुस्तक में दी गयी है।

यहाँ के संपन्न सामाजिक व सांस्कृतिक विरासत को इस क्षेत्र पर रिसर्च करने वाले बाहरी लोग समझ नहीं पाए या कम समझे हैं जिस कारण उन्होंने इसcm क्षेत्र के बारे में जाने अनजाने में अनेक प्रकार की भ्रांतिया फैलाने का काम लिया। नौगाँव बड़कोट, पुरोला, चकरौता व नैनबाग के बाजारों में घूमकर लोगों से सतही जानकारी लेकर इस क्षेत्र के बारे में गलत जानकारी पेश की है।

रवांई कल आज और कल पुस्तक में इस क्षेत्र के लेखक, साहित्यकार, समाजसेवी, व राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लेखों को प्रकाशित किया गया है जिन्होंने इस क्षेत्र के बारे में प्रमाणिक व तथ्यपरक जानकारी दी है। मुझे उम्मीद है कि यह पुस्तक उन लोगों के लिए प्रमाणिक जानकारी देने का काम करेगी जो रवांई-जौनपुर व जौनसार बावर पर काम करना चाहते है।

208 पेज की इस पुस्तक में इस क्षेत्र के उन लोगों की सूची भी दी गई है जो देहरादून, दिल्ली व मुम्बई जैसे महानगरों में जीविका कमाकर अपने क्षेत्र के लिए भी चिंतित रहते है और उनकी भलाई के लिए भी काम करते है। इसमें क्षेत्र के सामाजिक व राजनीतिक कार्यकर्ताओं की सूची भी दी गयी है। साथ ही यहाँ के स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाने वाले कलाकारों व खिलाड़ियों के बारे में भी जानकारी दी गयी है। कई छोटी-मोटी कमियों के बावजूद इस पुस्तक को समीक्षक बेहद सफल प्रयास बता रहे हैं।

इस पुस्तक की कीमत 250 रखी गई है और 50 रुपये का डाक खर्च जोड़कर इसे 300 रुपये का मनि आर्डर भेज कर मगवाया जा सकता है। पुस्तक मगाने का पता है… प्रबंधक – यमुना वैली पब्लिक स्कूल – नौगाँव, डाकघर – नौगाँव, जिला उत्तरकाशी (उत्तराखंड)

विजेन्द्र रावत (प्रधान सम्पादक) रवांई कल, आज और कल
मो.- 9717852888

This entry was posted on Wednesday, March 13th, 2013 at 7:40 pm and is filed under रंग-तरंग. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0 feed. You can leave a response, or trackback from your own site.

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